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Showing posts from May, 2026

"भेदभाव "

घर परिवार में चार बहूएँ हों या चार बहनें हों , वहाँ उन चारों में सबसे ज्यादा खटपट या भेदभाव छोटी बहन या छोटी बहू के साथ होता है । बहनें तो शादी-ब्याह के पश्चात् अपने अपने कार्यक्षेत्र में व्यस्त हो जाती हैं , घरेलू - गृहस्थिन बन गृह को सँभालती हैं लेकिन ससुराल पक्ष में जितना भेदभाव बड़ी बहू झेलती आ रही थी वही मंझली के आते ही बहू के पहनावे में से साड़ी ने सलवार- सूट को बदला है , तीसरी के आते ही सलवार सूट से जींस टाॅप बदला , चौथी / छोटी के आते ही सीधे  कैफ़री ( हाफ पैंट) और स्लीवलेस टी- शर्ट।   बड़ी बहू बिचारी सुबह सुबह नहा धोकर साड़ी पहन चेहरे को घूँघट से झापते (ढकना) हुए पुजा- पाठ करती है , फिर सबका नाश्ता खाना तैयार करती है , सारा काम साड़ी में ही लदफदा कर बखूबी सँभालती है लेकिन क्या मजाल कि उसके चेहरे पर तनिक भी शिकन आए या थकान को जाहिर करे । यह वाकया 30- 40 बरस पहले , अब समय बदल गया है , मँझली बहू आ गई है साड़ी से सलवार सूट पर और बड़की से कहती है दीदी तुम भी सूट पहना करो। ससुराल है कोई स्कूल नहीं कि ड्रेस कोड हो बस सास ससुर के सामने दुपट्टा सिर पर रख लेना । इस तरह दोनों दि...