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मायके में अब भैया नहीं रहे तो क्या हुआ

 सुबह से बुआ के आने की बाट बाबू जी जोहने लगते हैं कि अभी बच्ची अपने मायके गयी होगी जल्दी जल्दी अपने भाईयों को राखी बांध कर लौटती ही होगी।

बुआ बाबू जी की बुआ की बेटी थी। लेकिन अपने घर से ज्यादा ननिहाल में रही थी तो हम उम्र मामा जी के बेटे संग भाई, मित्र, दोस्त बनाम दुश्मन यानि फुल भाई बहन वाला रिश्ता था। बुआ बताती हैं कि कोई दिन ऐसा नहीं जाता था कि ये मुझे बिन रुलाये रहे।

सोते टाइम खटिया में चोटी बांध देते थे। कुछ देने के बहाने बुला कर हाथ फैलाने पर कोई कीडा रख देते थे। बाल खींच कर बुलाना तो अपना अधिकार समझते थे और फिर भी बुआ को बाबू जी के साथ रहना होता था।

बार बार राह पर खड़ी होकर बाबू जी के स्कूल से वापस लौटने की राह देखना, आते ही लोटा में पानी लेकर दौड़ना और कुछ ही देर में रोते हुए वापस लौटना।

बुआ कहती हैं कि मुझे याद है जब मेरी विदाई हो रही थी तब भैया घर छोड़ कर तालाब पर जाकर बैठे थे कि रोना आयेगा और रोते देखेगी तो वापस आकर चिढ़ायेगी।

बुआ कहती हैं कि एक बार ससुराल में किसी ने किसी बात पर चिल्ला दिया था और भैया जाकर इतना तांडव किये थे कि सारे ससुराल वाले डर गए थे। जिसने डांटा था वो डर के मारे घर ही न आये और बाबू जी बुआ के दुआर पर चारपाई डाल कर उनके इंतजार में शाम तक बैठे रहे कि आज ससुरे को सीधा करके ही घर जाऊंगा।

वो दिन है कि आज का दिन है मजाल है जो कोई बुआ से ऊँची आवाज़ में बिन मतलब बोला हो।

 वर्षों पहले बाबू जी चले गए।

घर में सब बुआ के आने की मन ही मन बाट जोह रहे थे लेकिन पता था कि बुआ नहीं आयेगी।

बुआ हाथ में राखी लिए उस दिन भी आंसू पोछती हुई आई और दोनों भतीजों को बैठाया और राखी बांधी। रोते हुए बोली कि आज मेरे भैया नहीं हैं तो क्या हुआ मेरे दो भतीजे तो उनके जड़ से हैं।

तबसे बुआ हर वर्ष घर आती हैं और चाचा जी लोगों के साथ साथ अपने भतीजों को बड़े भैया की जगह पर राखी बांधती हैं।

त्योहार प्यार, रक्षा, सुरक्षा, खुशी का दिल से मनाया जाने वाला त्योहार है। भाई बहन ही नहीं आप विकल्प में किसी को भी राखी बांध दीजिये।

भाई नही है तो भगवान जी को बांधी जा सकती है।

हमारे पुरोहित जी अपने यजमानों को बाँधते हैं, मेरी बेटियां आपस में एक दूसरे को बांधती हैं। मेरी छोटी बहन भाईयों के साथ साथ मुझे भी राखी बांधती हैं।

बहन नही है या भाई नही है तो त्योहार फीका न करके कोई विकल्प अपना कर त्योहार मनाने में त्योहार का अर्थ समझ कर उसे पूरी आयु निभाने में मुझे तो कोई दिक्कत नहीं नजर आती बाकी आप सभी लोग कॉमेट में अपने विचार अवश्य दीजिये।


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