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मैं #बलात्कारी हूं

 बहुत दिन से सोच रहा था कि अपना परिचय आप लोगों को दे ही दूँ आखिर पूरे देश में, खबरिया चैनल्स में, इंटरनेट और हाँ सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर तो सब से ज्यादा मेरे बारे में ही तो बातें हो रही हैं…..फेसबुक के स्टेटस से लेकर ट्विटर और ब्लॉग्स बस हर जगह मैं ही मैं। कोई सा भी अख़बार खोल लो हर पन्ने मे मेरी ही ख़बरे। आप भी सोच रहे होंगे कि साला आखिर मैं हूँ कौन ?

मैं वही हूँ जिस के डर से माएं अपनी बेटियों को दिन के उजालें में भी कहीं भेजने से डरती हैं, मैं वो हूँ जिस का डर हर लड़की को खचाखच भरी बस से लेकर मेट्रो, मार्किट, सुनसान सड़कों, बस स्टैंड, मॉल, स्कूल, कॉलेज, दफ्तर यहाँ तक खुद के अपने घर तक में सताता रहता है…. और मैं वो भी हूँ जिस का चेहरा कभी भीड़ में नज़र आता है तो कभी बस में, कभी सुनसान रास्तों पर तो कभी होटल की लिफ्ट में, कभी दफ्तर में तो कभी किसी आश्रम में, कभी कभी तो अपने ही घर में।

मैं वही हूँ जो हर रोज़ दिन में कई कई बार रिश्तों और इंसानियत का क़त्ल कर इस समाज को लहूलुहान कर देता हूं । मैं वो हूँ जो उम्र नहीं देखता, मांस का लोथड़ा देखता है …उसे खा जाता है …मासूम सी हंसी को हमेशा हमेशा के लिए खौफ़ में तब्दील कर देता है …मैं वो हूँ जो शरीर से आत्मा को अलग कर देता है , उसे जार जार कर देता है

मैं हर बार भेष बदल के उसी भीड़, उसी समाज में चैन से रहता हूँ जिस का आप हिस्सा हैं | कभी मैं किसी बड़े ऑफिस का बॉस तो कभी मैं तरुन तेजपाल बन जाता हूँ, कभी आसाराम तो कभी वर्ल्ड बैंक का सीईओ, कभी गोपाल कांडा तो कभी टॉफी खिलाने का लालच देने वाला पड़ोस का अंकल, कभी घर के रिश्तेदार, यहां तक कभी-कभी तो मैं बाप-भाई के शक्ल में भी आता हूँ । रिश्तों के नाम में क्या रखा है..मेरा मकसद सिर्फ और सिर्फ बेटी-बेटी, बहन-बहन, दोस्त-दोस्त और न जाने क्या क्या बोल कर उससे अपनी भूख मिटानी होती हैं ।

मैं वही हूँ जो जिसकी मौत संभव नहीं है…मै वहीं हूँ जिसको कोई भी सजा काफी नहीं है…मैं वहीं हूँ जिसकी संख्या इस समाज में अनगिनत है…मैं वहीं हूँ जहां जाति और धर्म का कोई भेद नहीं होता… मैं वहीं हूँ जो अमीरी-गरीबी के फेर में भी नहीं पड़ता….और हां एक बात का ध्यान रखना मेरे पास सबसे बड़ा हथियार है…वहीं समाज की खोखली इज्जत, जो मुझे हर घड़ी ताकत देता है।

इस वक़्त के भारत की सब से बड़ी लाचारी हूँ मैं, एक बलात्कारी हूँ मैं।


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