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अनमोल उपहार

 कॉलेज के दिनों से बलराम की सबसे बड़ी इच्छा थी कि उसे एक बेहद सुंदर पत्नी मिले. उसका रंग रूप ऐसा हो कि दोस्त और रिश्तेदार बस देखते रह जाएं.

साधारण व्यक्तित्व वाले बलराम की ईश्वर ने आख़िरकार सुन ली थी.गोपिका के रूप में उसे अपने सपनों की दुल्हन मिल गयी थी.गोरा रंग,छरहरा व्यक्तित्व, आकर्षक फेस कटिंग ऊपर से गोपिका का सॉफ्टवेयर इंजीनियर होना.

सात फेरे पूरे होने के साथ ही बलराम खुद को दुनिया का सबसे खुशक़िस्मत पुरुष समझ रहा था.गोपिका के लिए कितनी सारी प्लानिंग की थी बलराम ने.

शानदार हनीमून, ख़ूब सारी शोपिंग, गहने,कपड़े.उसने तय कर लिया था कि इतनी सारी खुशियां देने वाली पत्नी को वो भी हथेली पर रखेगा.

पहली रात को मुंह दिखाई का तोहफ़ा ऐसा हो कि गोपिका खुशी के मारे उछल  पड़े.

इसके लिए उसने कितने ही दोस्तों से सलाह ली थी,इंटरनेट पर रात दिन सर्च किया था तब जाकर उसे अपनी निराली बीवी के लिए कोई उपहार पसन्द आया था.

आख़िर वो रात आ गयी थी जब वो मन भर कर गोपिका को निहार सकता था.उसकी नाजुक सी हथेलियों पर अपनी हथेलियां रख सकता था.जी भर कर उससे बाते कर सकता था.

उसने कितनी बार फिल्मों और टीवी सीरियलों में देखा था कि कैसे पति पहली बार बेडरूम में जाता है तो नई- नवेली दुल्हन शादी के जोड़ें में, खुद में, खुद को समेटे बैठी रहती है.पति कितनी नज़ाकत से उसका घूंघट उठाता है.दुल्हन का शरमाना,फिर दोनों का एक-दूसरे के आगोश में समा जाना.प्यार और रोमांस के वो पल आज उसके जीवन में भी आने वाले थे.

बलराम ने आहिस्ता से कमरें में प्रवेश किया तो पूरा कमरा ताज़े सुगन्धित फूलों की ख़ुशबू से गुलज़ार था.फूल वाले कारीगरों ने कमरे को बहुत ही क़रीने से सजाया था.

फूलो से सजा बिस्तर तो दिख रहा था पर उसमे कही भी गोपिका क्यों बैठी नही दिख रही थी?

तभी बलराम ने देखा कि गोपिका वाशरूम से नाईट गाउन पहने चेहरे पर फेस क्रीम मलते हुए बाहर आ रही थी.

कमरे के अंदर का माहौल बलराम की कल्पनाओं से काफ़ी अलग-सा था .बलराम को देखने के बाद भी गोपिका के चेहरे पर कोई विशेष प्रतिक्रिया नही थी.बल्कि उसने लैपटॉप खोलकर कुछ टाइप किया फिर शटडाउन कर बेड पर आ गयी थी.

वैसे हल्के आसमानी नाईट गाउन में गोपिका बलराम को बेहद मनमोहक लग रही थी.

बलराम ने पास जाकर उसकी हथेलियों पर आहिस्ता से अपनी उंगलियों से छू रहा था.

"बलराम लगातार फंक्शन्स, मेहमानों और शोर- शराबे से एकदम थक गई हूँ मैं.क्यों न हम लोग अभी सो जाएं."

आहिस्ता से बलराम के हाथों से अपनी हथेलियों को छुड़ाते हुए गोपिका ने कहा तो बलराम के जैसे होश उड़ गए थे.

उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि वो कैसी प्रतिक्रिया दे.गोपिका के इस विचित्र  व्यवहार ने बलराम के अरमानों में जैसे पानी फेर दिया हो .

कुछ देर विचलित रहने के बाद बलराम ने खुद को एकत्रित से किया था.मन को ये कहते हुए किसी तरह उसने मनाया क़ि गोपिका ठीक ही तो कह रही है.अब तो हर रात हर दिन हमारा अपना है.

"गोपिका एक बेहद खास उपहार है तुम्हारे लिए...."

"उपहार भला कहाँ भागा जा रहा है.अभी ड्रावर में रख दो, कल देख लूंगी."

करवट दूसरी ओर बदलते हुए गोपिका ने टका- सा जवाब दे दिया था.

देखते-देखते गोपिका गहरी नींद में चली गयी थी. वहीं बलराम की आंखों से नींद और दिमाग से शांति कोसों दूर जा चुकी थी.

उसके सारे ख़्वाब ताश के पत्तो से बने महल की तरह भरभरा कर बिखर चुके थे.

आख़िर गोपिका ने उसके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया था?क्या उसे बलराम पसन्द नही था?क्या उसकी शादी उसकी मर्ज़ी से नहीं हुई थी? या उसे अपनी सुंदरता पर इतना ज्यादा घमंड था?

सैकड़ों सवाल हथौड़े बनकर बलराम के मस्तिष्क की नसों से टकरा रहे थे.

कुछ देर पहले तक खुद को संसार का सबसे खुशक़िस्मत समझने वाला बलराम अब सबसे दुःखी इंसान बन गया था.

न जाने कब उसकी आंख लग गयी थी.

अचानक जब नींद खुली तो घड़ी में ग्यारह बज रहे थे.

कमरे में उसके सिवाय कोई नही था.

वो जल्दी से बाहर आया तो माँ अकेले रसोई में लगी हुई थी.

"मां गोपिका कहाँ है."

"बहू तो सुबह नो बजे से लेपटॉप लेकर उस कमरे में बंद है.जाने कब से किस किस से बात किये जा रही है.हमने नाश्ता करने के लिए आवाज भी लगाई पर कोई जवाब नही दिया उसने."

अब बलराम के लिए सब कुछ सहन सीमा से बाहर जा रहा था. वो तेजी से बंद कमरे के दरवाजे की तरफ बढ़ा ही था कि दरवाजा खोल गोपिका मुस्कुराते हुए बाहर आती दिखी उसे.

बाहर आते ही गोपिका ने मांजी का पांव छूआ और अपने मोबाइल पर आये एक ईमेल को बलराम की तरफ बढ़ा दिया.

हैरानी से भरे बलराम ने जल्दी से ईमेल पढ़ डाला.

पर आखिर क्या था उस ईमेल में कि घर का माहौल एकदम से बदल गया था.

बलराम ने खुशी के मारे गोपिका को माँ के सामने ही पकड़ कर उठा लिया था.

"अरे हुआ क्या है, कोई मुझे भी बताएगा?."

मांजी झल्लाते हुए चिल्ला उठी थी.

"मांजी मैं एक सामान्य सॉफ्टवेयर इंजीनियर से कम्पनी की एरिया जनरल मैनेजर बन गयी हूँ.तीन गुना तनख्वाह और बहुत सारी दूसरी सुविधाएं."

बोलते हुए गोपिका के होंठ और शरीर के अंग अंग खुशी से कांप रहे थे.

"दरअसल आज सुबह नौ बजे से मेरा इंटरव्यू था. इतने इम्पोर्टेन्ट साक्षात्कार को लेकर मैं काफी तनाव में थी. रात मैंने जानबूझकर इनसे अच्छे से बात नही कि ताकि पूरी नींद ले कर सुबह फ्रेश मूड में इंटरव्यू दे सकूं."

गोपिका ने आहिस्ता से अपना सर सास के सीने पर रख दिया था.

"बलराम, पता है आपसे कलरात मैंने तोहफा क्यो नही लिया....क्योंकि आपके इतने प्यार से लाये तोहफे के बदले मैं भी आपको हाथों-हाथ आपकी बीवी के शानदार प्रमोशन का तोहफा देना चाहती थी.आखिर आपके अनमोल उपहार के बदले मुझे भी तो कुछ यादगार सा गिफ्ट आपको देना था"

"बस बहू, तुम्हें अब किसी सफाई की जरूरत नही है.आते ही तुमने तो घर को इतनी बड़ी खुशी का तोहफा दे दिया है."

बलराम मन- ही- मन अपनी किस्मत पर इतरा रहा था.उसे क्या पता था कि गोपिका जितनी सुंदर थी, उससे भी ज्यादा वो एक समझदार महिला थी.अपनी नई- नवेली दुल्हन के लिए उसके मन मे अब प्रेम से ज्यादा सम्मान था.

रात जब वो कमरें में आया तो गोपिका दुल्हन के जोड़े में खुद में सिमटी हुई अपने बलराम का इन्तेजार कर रही थी.

फूल कुछ बासी से हो गए थे पर बलराम को आज उनकी खुश्बू कल से भी ज्यादा महसूस हो रही थी.

सहरिया


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