शादी के एक महीने बाद एक दिन राज ने थोडी तेज आवाज में ऋतू से बोला "यार खाने में इतनी नमक!!!!कैसे खाना बनाया तुमने"?
जब पाँच मिनट तक ऋतू की कोई जबाब नही आया तो वह फिर चिल्लाया "ऋतू कहाँ हो तुम"!!।फिर जब उठकर देखने गया तो देखा ऋतू बेहद डरी सहमी घबराई सोफे के कोने में सिकुड़ी हुई बैठी है और सामने राज के टंगे पैंट के बेल्ट की तरफ देख रही है ।कड़ाके की ठंड में भी उसका पूरा शरीर पसीने से तर बतर है।वह ऐसे काँप रही थी जैसे कोई बच्चा पिटाई के डर से काँपता है।
राज ने आज से पहले ना तो कभी ऐसे आवाज़ में ऋतू से बात की थी ना ही कभी उसे ऐसे हाल में देखा था।वह ऋतू को बहुत प्यार करता था ,जैसे ही ऋतू के पास गया "मुझे मत मारो!!!! ""मुझे मत मारो !!!!"कहते हुए एकदम एब्नार्मल सी होकर राज के पैरों में गिर गयी।बार बार उसकी नज़र पैंट के उस बेल्ट पर जा टिकती थी।
डॉ राज ने तुरंत ऋतू को अपनी बाहों में भर लिया पानी पिलाया और बड़े प्यार से पूछा की इतना डर क्यों?तुम्हें हुआ क्या? इतनी छोटी सी बात पे इतनी घबराहट क्यों?और तुम ये बार बार बेल्ट की तरफ क्यों देख रही थी?
थोडा नार्मल होते ही ऋतू न रोते हुए राज को गले लगा लिया और बोली" जब से होश संभाला तो अपने घर पे बचपन से ही देखती आयी कि माँ की छोटी छोटी गलती पे भी पापा माँ पे गुस्से से जोर जोर से चिल्लाते और मेरे सामने बेल्ट से बहुत मारते थे।बहुत बुरी तरह मार खाने के बाद भी माँ मेरे कारण जोर जोर से रोती भी न थीं और मुझे हमेशा सीने से लगाये रखतीं थी यक़ीनन मेरे लिए ही वह पूरी जिंदगी मार खाकर जिन्दा रहीँ नही तो पता नही कब की मर जाती।पापा अपनी नाकामी और ऑफिस के तनाव हमेशा माँ पे ही निकालते थे।"
मुझे तुम्हारी चिल्लाहट से लगा जैसे बेल्ट से हमेशा माँ की पिटाई होती थी वैसे ही आज मेरी होने वाली है.......
-------संकलित
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