मैं एक कामकाजी महिला !!
एक फुर्सत के दिन के लिए बेताब ....
अभी दस दिन पहले !!
सरकार ने कहा,
दिवाली है छुट्टी हैं ;
घर परिवार ने भी कहा छुट्टी है ,
समाज, रिश्तेदार, मित्रों ने भी कहा छुट्टी है,
मैं भी खुश !!
चलो छुट्टी है ...
सुबह की आपाधापी नहीं अब कुछ दिन
पर घर... !!
जरूरतों और फरमाइशों का पिटारा ::
आज तो अच्छा सा नाश्ता बना दो ,
सुनो !!
आज लंच में ये बना लेना ,
दिवाली पर घर साफ चमकता हुआ होना चाहिए ...!
सुबह से उठकर लगी ढूंढने ,
घर का कोना कोना छान मारा ...!
बाथरूम,रसोई पंखे छत सब
आँगन, बाग फूल पौधे सब
घर के गर्म ठंडे कपडों में ,
सुबह की धूप में,
और रातों में भी !!
हर जगह तलाशा ,
पर ....
छुट्टी कहीं नहीं मिली :
मैं.......
देखना चाहती थी ..,
सब खुश होते हैं जिस छुट्टी से
आखिर वो कैसी होती है... ?
क्या वो बहुत खूबसूरत होती है ..?
मेरी सखियो.....
तुम ही बताना
गर तुमने देखी हो ??
मुझे भी बताना...........
छुट्टी कैसी होती है ..?
कैसी दिखती है छुट्टी ...?
जरा मुझे भी समझाना........
Comments
Post a Comment