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इश्क इन दिनो

 वो एक छोटे कस्बे की लड़की थी,दुनिया के रीति रिवाजों से अनजान एक मासूम लड़की!उसे लगता था सारी दुनिया में सिर्फ भले लोग ही रहते हैं!वर्तमान सामाजिक गंदगी से वो पूर्णतः अनभिज्ञ थी! बचपन की दहलीज पार कर युवावस्था में उसके कदम पड़े,सब कुछ नया नया,जैसे फिजायें बदल गई हो,सूरज नरम पड़ने लगा हो,चाँद थोड़ा और चमकीला दिखने लगा हो।उसे कभी नहीं लगा कि वो भी आकर्षक दिख सकती है,लेकिन लगातार मिलने वाली तारीफों से उसे यकीन होने लगा कि उसमें कोई तो बात है।

उच्च शिक्षा के लिए उसे क़स्बा छोड़कर शहर जाना था।किताबों से दोस्ती रखने वाली वो लड़की आज एक आज़ाद पंछी थी,हॉस्टल के बगीचे से उठने वाली फूलों की खुशबू में उसका तितली मन उड़ने लगा था। बाजार,सिनेमा,पार्क हर जगह उसका मन लगने लगा था,सिर्फ किताबों से उसे अरुचि हो गई थी।आज हॉस्टल आये उसे पूरे चार माह हो गए थे,इन चार महीनों में वो इतना बदल गई कि कई बार खुद को भी नहीं पहचान पाती।सादा कुर्ते की जगह तंग टीशर्ट और जींस नें ली थी।अब हाथों में किताबों की जगह मोबाईल नें ले ली थी,परिवार को समय देने की जगह एक लड़के नें ले ली थी,अब ज्यादातर समय उसके साथ भविष्य के सपने संजोने में ही बीतने लगा।क़स्बे की हवा में पकी उसकी मासूमियत आधुनिक शहर की चमकीली धूप में कुम्हलाने लगी थी।लड़का उसे दिन में चाँद तारे दिखलाता,कभी अपनी बातों से उसे समंदर पार ले जाता।दिन सुनहरे ख़्वाबों की चादर ओढ़े बीतते जा रहे थे,रातें और ज्यादा स्याह होती जा रही थी।हालांकि सेमेस्टर के परिणामों नें उसके खुशनुमा पलों पर क्षणिक अंकुश लगा दिया था,हर विषय में लगभग फेल! लेकिन शुक्र है उसके आंसुओं को पोंछने और सहानुभूति का कंधा देने उसका पुरुष मित्र मौजूद था।वो अपना सब कुछ उसपर वार चुकी थी,अपना क़ीमती समय..सपने..अपनी चेतना और अपना ज़िस्म !

उसके जीवन के अठारह वसंत पूरे होने में अभी भी कुछ वक़्त बाकि था कि उसे ज्ञात हुआ वो अपने अंदर एक और जीवन को सांसें दे रही है..उसका खूबसूरत मासूम चेहरा भय से पीला पड़ चुका था,उसके वजूद की ज़मीं हिलने लगी थी,क्या जवाब देगी वो अपने बाबूजी को,जिन्होनें इतने अरमानों से उसे पढ़ा लिखा कर कर्ज लेकर उच्च शिक्षा के लिए दाखिला दिलाया था!लेकिन इस बार भी उसे सांत्वना देने के लिए उसके बीज़ का पोषक पुरुष मित्र मौजूद था।

"हम शादी करेंगे जानू,तुम फ़िक्र न करो सब ठीक होगा अभी के लिए तो हमें इसे दुनिया में आने से रोकना होगा..मैं हूँ न तुम्हारे साथ हमेशा!"

लड़की के लिए ये किसी वज्रपात से कम नहीं था,फूल सी नाजुक कच्ची उम्र और पहाड़ जैसा निर्णय!! खैर आख़िरकार उसने वही किया जो उसके मित्र नें करवाया।

लड़की अभी भी उसके रंग में आकंठ रंगी हुई थी,उसे सारी दुनिया ज़ालिम और दुश्मन नजऱ आती सिवाय उसके पुरुष मित्र के!पुरुष मित्र की एक और सामान्य मित्र थी जिससे अक्सर उस लड़की की बातचीत होती रहती थी।महिला मित्र अधेड़ उम्र की एक धनाढ्य महिला थी जो लड़के के अनुसार उसकी सबसे अच्छी शुभचिंतक थी।वो उस लड़की की भी बहुत अच्छी मित्र बन गई।

लड़के के अनुसार वो अधेड़ महिला ज़िन्दगी से हारी हुई औरत थी,जिसका पति उसे कुत्ते के बराबर भी इज्ज़त नहीं देता था,यहाँ तक कि उसके बच्चे भी उसका तिरस्कार करते थे,वो अवसाद की इस हद तक शिकार है कि उसे कई बार ब्रेन स्ट्रोक हो चुका है,रोज नींद की गोलियां लेनी होती थी।ऐसे में एक वही था जो उसे मानसिक तौर पर आराम पहुंचाता था,एक तरह से उस महिला से मैत्री करके वो पुण्य का ही कार्य कर रहा था! इतना सब जानकर लड़की की नजरों में लड़का और भी महान बन गया।अब तो वो उसकी पुजारिन बन गई!

एक रोज़ बातों बातों में उस अधेड़ महिला नें लड़की को बताया कि वो उस लड़के से मोहब्बत करती है,और लड़का भी उसे उतना ही चाहता है,लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर वह उससे शादी नहीं कर सकती।लड़की नें इसे मज़ाक समझा,दोनों के बीच उम्र का इतना फ़ासला था कि लड़की के लिए ये स्वीकार करना ही नामुमकिन था।

लड़के की एक और महिला मित्र थी,वो भी अधेड़ उम्र की थी,जो महानगर में रहती थी।लड़के के अनुसार वो महिला उसकी दूर की मौसी लगती थी लेकिन मित्र वाली भावना ज्यादा थी।वो महिला भी उसकी जिंदगी में एक अहम किरदार थी,वो अपने हर छोटे बड़े निर्णय उसके साथ साझा करता था।लड़के नें अपनी दूर की मौसी को भी लड़की के बारे में बताया।मौसी नें लड़की से फोन पर बात की।मौसी का रवैया लड़की के लिए थोड़ा रूखा था।लड़की समझ नहीं पाई आखिर किस वजह से लड़के की मौसी उसके प्रति नकारात्मक है।

लड़की नें उस अधेड़ महिला से बातों बातों में लड़के की दूर की मौसी का जिक्र किया,अधेड़ महिला पहले से उसे जानती थी,लड़के नें काफी बार उसे अपनी मित्र के बारे में बताया हुआ था।

"तुम बहुत भोली हो,वो कोई उसकी मौसी वोसी नहीं है..महिला मित्र है..उसे तो मुझसे भी एलर्जी है,वो मुझे भी बिल्कुल नापसंद करती है।"अधेड़ महिला मित्र नें लड़की को बताया।

"लेकिन क्यूँ, आपसे उन्हें क्या समस्या है!!"लड़की की जिज्ञासा बढ़ चुकी थी।

"दरअसल ये दुनिया वैसी नहीं है जैसा तुम्हे दिखाया जा रहा है।खैर छोड़ो..परेशान मत होना।"अधेड़ महिला नें गोलमोल उत्तर दिया।

समय बीतता गया।लड़की की शिक्षा बहुत ही कम अंकों के साथ लगभग पूर्ण हो चुकी थी,सिर्फ दो महीने शेष थे घर वापसी में।लड़की अंततः लड़के के साथ विवाह चाहती थी,उसने कई बार लड़के को अपने माता पिता से मिलकर आने को कहा लेकिन लड़का हर बार कोई न कोई बहाना बना कर टाल देता था।

"तुम विवाह करना भी चाहते हो यूँ ही समय व्यतीत कर रहे हो!!"लड़की नें कुंठित होकर कहा।

"कैसी बात कर रही हो जानू, मैं तुम्हारे सिवा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता,बुरा न मानों तो एक बात कहूँ...मैं चाहता हूँ कि तुम किसी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी का बहाना लेकर कुछ समय और ठहर जाओ यहीं पर,हम लिव इन रिलेशनशिप में रह लेंगे तब तक..।"लड़के नें बड़े ही कोमल स्वर में अपनी बात कही।

"लेकिन लिव इन रिलेशनशिप की जरुरत ही क्या है?शादी करने में क्या समस्या है?देखो,मैं अब और ज्यादा प्रतीक्षा नहीं कर सकती,मेरे घर पर मेरे विवाह की बातचीत चल रही है।"

"ऑफ्फो मैंने कब मना किया शादी के लिए! मैं तो बस तुमसे समय मांग रहा हूँ,एक बार मैं अपने पैरों पर खड़ा हो जाऊं उसके बाद करेंगे न शादी,क्या जल्दी है..."लड़के नें इत्मिनान के साथ कहा।

एक दिन लड़की के पास लड़के की दूर की मौसी का फ़ोन आया,वो लगातार उससे लड़के की जिंदगी से चले जाने की बात कर रही थी,लड़के की बहुत सी बुराइयां उसने खोल कर रख दी, उसे लम्पट,आवारा और शातिर खिलाड़ी तक बताया।लड़की अचानक हुई इस बात से घबरा गई और सीधे लड़के को बताया।

लड़के नें सारी बातों को एकदम बकवास बताया और लड़की को दुबारा मौसी से बात न करने की नसीहत भी दे डाली।

लड़की के दिमाग की बंद खिड़कियां अब खुलने लगी थी,अब वो बात की तह तक जाना चाहती थी,उसनें उन दोनों की कॉमन मित्र उस अधेड़ महिला से मिलने का निश्चय किया।

"क्या करोगी जानकार..तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा,ये दुनिया अपने आप में एक जंजाल है,तुम,मैं सब इसमें फंसे हुए हैं..।"अधेड़ महिला नें दार्शनिक अंदाज़ में कहा।मैं सबकुछ जानती हूँ लेकिन तुम इतनी मासूम हो कि शायद ये सब सुनकर तुम स्वयं को संभाल नहीं पाओगी।"

"आप बताइए तो सही,मुझे सँभालने के लिए वो है मेरे पास हमेशा..।"लड़की की बातों से लड़के के प्रति उसका अगाध विश्वास साफ़ साफ़ झलक रहा था।

"एक बात बताओ..तुम उसपर इतना अँधा विश्वास क्यों करती हो,क्या कभी तुम्हे महसूस नहीं हुआ कि वो तुम्हारे लिए ठीक नहीं है।"कॉफी का घूँट लेते हुए अधेड़ महिला नें पूछा।

"मैं शायद खुद पर भी कभी इतना विश्वास नहीं करती जितना उसपर करती हूँ,वो मेरे लिए सब कुछ है,मेरा सोलमेट है।"

"सोलमेट...!!!हुंह...कभी मैं भी उसकी सोलमेट हुआ करती थी..।जानू आई लव यू..यू आर एवरीथिंग फॉर मी.. यू आर माई सोलमेट इन ट्रू सेन्स.."।अधेड़ महिला नें बताया।

"वॉट!!!! ये सब तो वो मुझे कहता है।" लड़की को उसकी बातों पर यक़ीन नहीं हो पा रहा था।

"हाँ, अब तुम सोचो ये सब मुझे कैसे पता !"डियर, वो रोज रात को मुझे ये सब मैसेज भेजता था।"महिला कहती जा रही थी।"दरअसल उसने हम दोनों को ही 'यूज़' किया है,और हमें ही क्यों...हमारी जैसी न जाने कितनी महिलाएं उसकी जिंदगी में आयी,और अभी तक हैं,वो कभी किसी एक के लिए गंभीर नहीं हो सकता..इम्पॉसिबल।आगे जो मैं बताने जा रही हूँ उसे ध्यान से सुनना, एक एक शब्द सत्य है।वो जो उसकी दूर की मौसी है न वो भी दरअसल हमारी तरह ही उसकी क़रीबी.. बेहद क़रीबी मित्र है, इतनी कि उसकी इजाज़त के बग़ैर वो पत्ता तक नहीं हिला पाता और फिर तुम तो बहुत दूर की बात हो..वो कभी तुमसे शादी नहीं करेगा।बहुत पैसे वाली है वो दिन के लाखों कमाती है बैठे बैठे।और जहाँ तक मुझे मालूम है महिला के साथ भी उसके अंतरंग अवैध संबंध हैं..ये सम्बन्ध तक़रीबन दस साल पुराना है।और सबसे बड़ी बात ये कि उस महिला के पति को भी दोनों के बीच की गुटरगूँ के बारे में ज्ञात है लेकिन फिर भी बड़ी अज़ीब बात है उसके पति को कोई समस्या नहीं!! शायद महानगर में ये सब आम बात हो लेकिन तुम्हारे लिए ये सब कुछ सहन करना आसान नहीं होगा।क्या तुम ये सह पाओगी कि शादी के बाद भी तुम्हारा पति पचास औरतों के साथ व्यस्त रहे और तुम खड़ी खड़ी देखती रहो ! कभी नहीं डियर.!मुझे भी उसने यही सब सब्ज़बाग दिखाये थे जो आज तुम देख रही हो,शुक्र है मैंने उसके कारण अपने पति से तलाक़ नहीं लिया,उसने तो बहुत कोशिश की थी।खैर !मुझे उसकी फ़ितरत के बारे में पहले से भी थोड़ी बहुत जानकारी थी लेकिन सबसे बड़ा झटका मुझे उस वक़्त लगा जब उसने मुझे तुम्हारे बारे में बताया,मैं समझ गई थी कि तुम उसकी नई शिकार हो।और इतना भी मैंने जान लिया था कि जो कुछ मेरे साथ हुआ मैं उसके योग्य थी,मैं कोई दूध की धुली नहीं थी..पर्दा पड़ जाता है आँखों के आगे जब इश्क़ का भूत सवार होता है..और इस तरह के शिकारी इसी फ़िराक में रहते हैं कि कब किसी का फ़ायदा उठाया जाए।

अरे! तुम्हारी कॉफ़ी तो बिल्कुल ठंडी हो गई है!! अधेड़ महिला नें बात को बीच में रोकते हुए कहा।

लड़की शून्य होकर कॉफी मग को पथराई आँखों से देखे जा रही थी।उसके शब्द गले में कहीं फंस गए थे।

"अरे अब कुछ बोलो भी...ऑफ्फो मेरी बेटी का फोन आ रहा है,मुझे अब जाना होगा..तुम प्लीज़ अपना ध्यान रखना...और सुनो कॉल जरूर करना। बाय टेक केयर..।

महिला जा चुकी थी। लड़की अभी भी कॉफ़ी शॉप में यूँ ही यथावत बैठी हुई थी।उसके पाँव जैसे जमीन में आधे गड़ चुके थे।कॉफ़ी मग अब धुंधला दिखाई दे रहा था।यंत्रवत उसने अपना फोन निकाला और लड़के को मैसेज किया..'मिलना है अर्जेंट'।

"सुनो,आज मैं जो कुछ भी पूछूँ सब सच बताना,तुम्हे अपनी माँ का वास्ता।"लड़की नें आँखों में आँखें डालते हुए कहा।

"हम्म,पूछो..ऐसा क्या अर्जेंट काम था!"

"ये मिसेज़ वालिया यानि दूर की मौसी के साथ तुम्हारा क्या संबंध है?मैं जान चुकी हूँ तुम दोनों पिछले दस सालों से सम्बन्ध में हो।आज सब कुछ स्पष्ट कर दो।"लड़की नें दो टूक शब्दों में बात रखी।

"ओह! तुम्हें ये सब कहाँ से मालूम हुआ? मेरा मतलब..मैं तुम्हे सब सच बताता लेकिन सही समय का इंतज़ार कर रहा था।"

"ग्रेट !! यानि आपकी फ्रेंड सब सच कह रही थी!इन्क्रेडिबल!ओह गॉड !हाऊ केन यू डु दिस?अपनी माँ की उम्र की औरत के साथ संबंध!! छी..मुझे तो ये बात सोचते हुए भी शर्म आ रही है।"

"इसमें मेरा कोई क़सूर नहीं है..वो औरत उस वक़्त मेरी ज़िंदगी में आयी जिस वक़्त सब नें मेरा साथ छोड़ दिया था.. यहाँ तक कि मेरे माँ बाबूजी नें भी मुझे आवारा और बेकार कहकर घर से बाहर कर दिया था, ये मेरी जिंदगी की कड़वी हक़ीक़त है।उस दौरान सिर्फ एक वही थी जिन्होंने मुझे मानसिक,शारीरिक,और आर्थिक तौर पर सहारा दिया।"लड़के नें अपनी सफाई में बात कही।

"ओह! शारीरिक तौर पर भी सहारा दिया!!कमाल है,आई सेल्यूट यू बोथ !!"लड़की नें आश्चर्य दिखाते हुए कहा।

"ओह! कम ऑन..यू आर गेटिंग मी रॉन्ग.. गलत मत समझो..उस वक्त मुझे जरुरत थी किसी अपने की..हम दोनों हॉलीडेज बिताने भी गए थे साथ ,इस बात का पता जब मेरी माँ को लगा तो उन्होंने हम दोनों को बहुत भला बुरा कहा।पिछले दस सालों से वो एक चट्टान की तरह मेरा साथ दे रही है।"

"आई एम नॉट गेटिंग यू रॉन्ग... पर ज़रा सोचो वो बावन साल की औरत है और तुम सिर्फ अठाइस साल के हो! ओह गॉड !वाई द हेल आइम आर्ग्युइंग विद यू !! जस्ट लेट मी क्लियर थिंग्स नाउ..इट्स आईदर मी ओर हर !"

गुस्से में लड़की के मुँह से ज्यादातर समय अंग्रेजी भाषा ही निकलती।

"आई कांट लीव हर..आई एम सॉरी!"लड़के नें स्पष्ट शब्दों में कहा। वो सोलमेट है मेरी..!"

"अगर वो सोलमेट है तो मैं कौन हूँ!!"

"तुम गर्लफ्रेंड हो मेरी..।"

दोनों ओर बर्फ़ जैसी चुभन भरी चुप्पी।

"ओके !चलो मान लिया,उस वक्त तुम्हें जरुरत थी किसी अपने की और उस महिला के साथ तुम्हारे संबंध बने लेकिन अधेड़ उम्र की अपनी उस महिला मित्र के बारे में क्या कहोगे जिनके साथ संपर्क के रहकर तुम बहुत पुण्य का काम कर रहे हो !!"लड़की नें चुप्पी तोड़ते हुए कहा।

"क्या उल्टा सीधा बोल रही हो...शक की भी एक लिमिट होती है..।"लड़का गुस्से से तिलमिला उठा।

"हाँ, लेकिन फ्लर्ट करने की तो कोई लिमिट नहीं होती!!"लड़की का जवाब आया।

"जस्ट गो टू हेल...तुम्हारे जैसी लोअर क्लास छोटे क़स्बे की लड़कियां पैदायशी बेवकूफ़ होती हैं..तुमने अपना दिमाग इस्तेमाल नहीं किया तो इसमें मेरा क्या क़सूर !! लड़के नें दो टूक उत्तर दिया।

लड़की बिना कुछ कहे ' लोअर क्लास 'और 'पैदायशी बेवकूफ़' का तमगा लेकर वहाँ से चल दी। शायद आने वाले दिनों में जिंदगी की उधड़ी हुई पोशाक में लगे इन दोनों 'तमगों ' का इनाम उसके लिए अनुभव का नया सूरज लेकर आये।

✍ अल्पना नागर


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