आज फिर नींद कोशिश करने पर भी नही आ रही थी ।कितनी याद आ रही थी समीर दा की ,
उनके साथ बिताये गये लम्हे, उसका असीम प्यार ,उसकी परवाह ,उनके गीत , उनका उसके लिये किया गया त्याग , सब कुछ एक एक कर के सवि के स्मृति पटल पर तस्वीर बन कर उभर रहे है थे ।
कैसे अचानक वो उसके जीवन में आये , कैसे उसके प्रति उनकी सहानुभूति, उनका स्नेह , , उनके गीत , उसके दिल में जगह बनाते चले गये।जानते हुए भी कि
उसका जीवन किसी और की अमानत है । उसे उदास देखकर एक दिन कहने लगे ," तू मुझे नही मिल सकती सवि , पर मेरा प्यार तुझे क्या कम लगता है ? देख इतनी बडी दुनिया में कोई है जो हमें अपना समझता है यह क्या कम है ,बोल ?"
क्या कहती सवि उसके
कटु अनुभवों से भरे नीरस जीवन को पहली बार अमृत की बूँदें मिली थी जैसे।
उसे परेशान देख कर कहते ," मै क्या करू सवि तेरे लिये ? "
उसकी निगाहों में प्रश्न चिन्ह जैसे
कह रहा हो कोई भी कुछ कर सकता है क्या ?
सवि को एक एक कर याद आ रहा है कैसे जब उस दिन समीर दा को पता चला कि उसे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से प्रताड़ित किया गया है तो आँखे नम हो गई उनकी , कहने लगे "छोड़ दे सवि , बहुत हो गया अब ,
मुझसे नहीं देखी जा रही तेरी तकलीफें ।"
तब सवि ने उनको देख पहली बार कहा ," आप अपने जीवन मे आगे बढ जाओ कब तक मेरे उन कष्टों से दुखी होते रहोगे जिसको दूर करने का कोई उपाय नहीं है।"
और जाने कहाँ से उसमें इतनी हिम्मत आ गई कि अपने आप को उनसे एकदम दूर कर दिया ।
फिर वो इस तरह लापता हुए कि आज तक कोई खबर नहीं मिली ।
कितने बार मन हुआ कि उनके किसी अजीज से पूछे उनके बारे में पर सोचती है कितनी मुश्किल से दूर हो पाई है उनसे , लापता ही रहने देना ठीक है फिर उनके जीवन मे खलल नही डालना है ।
अपने को समझा फिर वह तसल्ली देती है खुद को ।
पर कुछ रिश्ते दूर तो किये जा सकते है पर भूले नहीं जा सकते , एक कसक बन शामिल रहते है हमेशा ।
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