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छोटी छोटी बातों में खुशियों की तलाश करना इतना भी मुश्किल नही

 "चल यार एक हफ्तें की छुट्टी ले कर बाहर घूमने चलते है. मैं तो परेशान हो गया हूँ घर गृहस्थी से.इससे अच्छा तो शादी ही नही करता." रजत ऑफिस के लंच टाइम पर सुनील से बोला.

"क्यों ऐसा क्या हो गया ?"

"क्या बताऊं. किसी न किसी बात पर निधि से बहस हो जाती है.कभी घर के कामों को लेकर, कभी बच्चों को ले कर.समझ नही आता क्या करूँ."

"ज्यादा कुछ करने की जरुरत नही है बस छोटी छोटी बातों में खुशियों की तलाश करना सीखो.तभी खुश रह पाओगे और दूसरों को खुश रख पाओगे. याद रखना जिंदगी की छोटी छोटी खुशियां खोजनी नही पड़ती वो हमारे आस पास ही होती है.बस थोड़ा नजरिया बदलना पड़ता है. आज और कल में साथ जीओगे तो जीना मुश्किल हो जायेगा.जो बात आज शुरू करते हो उसे आज ही खत्म करो.कल की शुरुआत नये सिरे से करो फिर देखना जीने का मजा ही कुछ और है.लेकिन पहल खुद से करो."

रजत ने अगली सुबह से ही सुनील की बातों पर अमल करना शुरूआत कर दिया. वो खुद ही समय पर नही उठता था.जिससे सारे काम देर से होते.जिसके कारण उसे ऑफिस के लिए देर हो जाती थी.इसलिए वो घर में हर चीज के लिए जल्दी मचाता था.निधि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार करे कि रजत की चीजें उसके हाथ में थमाये.बस निधि को भी गुस्सा आ जाता और सुबह सुबह ही घर पानीपत का मैदान बन जाता.

आज सुबह निधि के उठने पर ही रजत उठ गया.रजत के जल्दी उठने से निधि हैरान थी.लेकिन चुप रही. दोनों ने साथ चाय पी. निधि किचन में लग गई और रजत बच्चों को उठाने लगा.सारा काम बिना शोर शराबें के होता रहा.समय ज्यादा था तो रजत को आराम से अखबार पढ़ने का मौका मिल गया और नाश्ते का भी.मूड अच्छा था तो ऑफिस में काम भी अच्छे से कर पाया. शाम को बाजार से सब्जियां भी खरीद लाया.क्योंकि निधि की बाकी शिकायतों के साथ एक शिकायत ये भी थी कि रोज सब्जी मंडी से आते हुए भी सब्जियां नही लाते.जिससे उसे जाना पड़ता है.ऊपर से फिर हजार नखरे होते है.ये क्यों लाई.वो क्यों नही लाई.

आज रजत ने कार सब्जी मंड़ी के पास रोक दी.सबकी पसंद की सब्जी और फल लिये.निधि हाथ में सब्जियों का बैग देख कर बहुत खुश हुई.जल्दी से पानी पकड़ाया और चाय बनाने लगी और दिन होता तो सुबह के कलह के निशाना निधि के दिमाग  रहते.जिसके कारण शाम को भी वो नाराज ही रहती.आज घर का माहौल बहुत अच्छा था.दोनों साथ चाय पीते हुए बातें कर रहे थे.बच्चे भी मम्मी पापा की लड़ाई न होने पर खुश थे.चाय पी कर निधि रात के खाने की तैयारी करने किचन में चली गई. निधि को जाते हुए देख कर रजत सोच रहा था कि सच में छोटी छोटी बातों में खुशियों की तलाश करना इतना मुश्किल भी नही.

शशि ध्यानी

दिल्ली


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