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खुशियों पर साझा हक तो मुसीबत में क्यों नही !!

 "मम्मी कुछ समझ में नही आ रहा रजत शीला की शादी में देने के लिए मेरे गहने मांग रहे है.क्या करूँ ?"

"बिल्कुल मत देना.उनका बिजनेस घाटे में चल रहा है तो इसमें तेरा क्या दोष.वो खुद इंतजाम करेगे और तेरी सास के पास भी तो गहने है वो क्यों नही दे देती "

"मम्मी, मम्मी जी के गहने तो पहले ही लोगों का कर्ज देने के लिए बेचने पड़े."

"तो क्या हुआ लेकिन तू बिल्कुल मना कर दे.ननद की शादी के लिए तू अपने गहने क्यों देगी.तेरे सास ससुर और दामाद जी अपने आप इंतजाम करेंगे.तू उनकी चिकनी चुपड़ी बातों में मत आ जाना.तेरे पापा ने कितनी मेहनत और प्यार से तेरे लिए वो गहने बनाये थे.तेरे अलावा किसी और का हक नही है उन गहनों पर समझी."

पीछे नाश्ते को बुलाने आई बहू सीमा ने सास और ननद की फोन पर हो रही सारी बातें सुन ली.

सीमा बहुत सुलझी और समझदार थी.कई बार उसने अपनी सासूमाँ को बातों बातों में समझाया भी था कि वो सुधा के घर के मामलों में दखलंदाजी न करे पर रानो जी की आंखों में अपनी बेटी के प्यार की पट्टी पड़ी थी. लेकिन आज सीमा सोच लिया था कि मम्मी जी को समझाना पड़ेगा .माना बेटी से मोह रखना अच्छी बात है पर उसके घर के मामलों में दखल देना अपनी ही बेटी की गृहस्थी बिगाड़ने का काम है.कही ऐसा न हो कि बेटी के घर तोड़ने का कारण मम्मी जी बनें.उसने मन ही मन एक योजना बनाई.

शाम के समय सीमा सभी के लिए चाय बना कर लाई.

"पापा जी,मम्मी जी और आप से (पति दीपक) एक जरूरी बात करनी है.

"मम्मी जी,पापा जी रमेश भाई का बिजनेस अच्छा नही चल रहा.बहुत घाटा हो गया. पापा भी रिटायर हो गये है.जो पैसे उनके पास थे मेरी शादी में लगा दिये थे इसलिए वो भी भाईया की मदद नही कर सकते. उन्हें पैसों की सख्त जरुरत है क्या मैं अपने मायके से मिले गहने उन्हें दे सकती हूँ. समय आने पर वो मुझे लटा देगा.अभी वो उन्हें गिरवी रख कर अपना बिजनेस बचा सकते है."

"तुम्हें अपने गहने देने की क्या जरुरत है. तुम्हारी भाभी भी तो अपने गहने दे सकती है.आखिर मुसीबत में घर की बहू काम नही आ सकती तो शादी करने का क्या फायदा."आंखे दिखाती हुई रानो जी बोली

"मम्मी जी जो बात आपको समझाना चाह रही थी वो आपने खुद कह दी.आज मैं अपने माता पिता द्धारा दिये गहने से भाईया की मदद करना चाहती हूँ तो  आप मुझे उलाहना दे रही है कि उसकी पत्नी को ये काम करना चाहिए.वो गहने भी उन्हें उनके मायके वालों ने दिये होगे,तो जब मेरी भाभी अपने गहने को पति के बिजनेस के लिए दे सकती है तो ननदोई जी अपनी इज्ज़त बचाने के लिए बहन की शादी में दीदी के गहने क्यों नही दे सकते.

बिजनेस में घाटा हो रहा है और उनकी बहन की शादी करना भी जरूरी है जो पहले से ही तय थी,तो ऐसे में दीदी अपने गहने अपने पति की मुसीबत में दे देंगीं तो क्या गलत करेगी.माना उन गहनों पर दीदी का हक है लेकिन जब वो गहने उनके पति के काम नही आ सकते तो उन गहनों का क्या मतलब." दीदी के सास ससुर और रजत भाईसाहब ने दीदी के लिए कभी कोई कमी नही की. जब भाईसाहब का बिजनेस अच्छा चल रहा था तो उन्होंने दीदी की हर इच्छा पूरी की.मम्मी जी जब खुशियों पर सबका साझा हक तो मुसीबत में क्यों नही ?

"लेकिन वो गहने उसके भविष्य के लिए है."

"माँ सीमा सही तो बोल रही है.गहने तो फिर बन जायेगें. अभी रजत को दीदी के साथ और सहयोग की जरूरत है." दीपक बोला.

"हाँ मैं ही बुरी हूँ.तुम सब अच्छे हो.तुम्हें भी कोई शिकायत है तो बोल दो." नाराजगी से रोमा जी किशोर जी को देखते हुए बोली.

"शिकायतें तो बहुत है जो मैंनें कभी कहीं ही नही.सोचा समय के साथ तुम समझोगी लेकिन तुमने अपने दिल,दिमाग पर नसमझी की पट्टी बांधी हुई है और जब बहू समझा रही है तो उसी पर गुस्सा हो रही हो.

एक बात बताओ.आज अगर मुझ पर कोई मुसीबत आ जाये तो तुम क्या करोगी ? क्या पीछे हट जाओगी ?क्या मेरी मुसीबत से ज्यादा तुम्हें तुम्हारे गहने प्यारे होंगे ?"

रानो जी सोच में पड़ गई.सोचने लगी सही तो कह रहे है सब.अपनी बेवकूफी से मैं अपनी ही बेटी का घर बरबाद कर रही थी.उसे गलत शिक्षा दे रही थी.

"मुझे माफ कर दीजिए .सचमुच मैं बहुत बड़ी गलती करने जा रही थी पर अब नही.अब मैं बेटी के ससुराल में हस्तक्षेप नही करूँगी न ही उसे गलत शिक्षा दूंगी."

आपने हमेशा मेरी नसमझी और जिद्द को अनदेखा कर अपने प्यार को कभी कम नही होने दिया.आज भी मेरी गलती माफ कर दिजिए.मेरी नसमझी के कारण मेरे लिए अपने प्यार को कम मत होने देना."

"रानो मैंनें तुम्हें हमेशा प्यार किया है और करता रहूँगा, क्योंकि प्यार कभी कम नही होता,बल्कि समय के साथ और गहरा होता जाता है." रानो का हाथ पकड़ते हुए किशोर जी बोले.

"पापा ,मम्मी आप भूल गये हम यही है." दीपक हँसते हुए बोला.

"अरे मुझे सुधा को फोन करना है."रानो जी शर्माते हुए चली गई.

किशोर जी ने प्यार से सीमा के सिर पर हाथ रखा.ऐसी बहू हो तो हर घर में खुशियां ही खुशियां होगी.

शशि ध्यानी

दिल्ली


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