"मामी आपको दिखाई नही देता.सारा दूध मेरे ऊपर गिरा दिया."
"बेटा दौड़ते हुए तुम आये थे.मैं तो ध्यान से ही चल रही थी."
"मामी झूठ बोलना आपका काम है मेरा नही.सब बोलते है आप झूठी हो.झूठ बोल कर मामा को फंसा लिया."
"चिंटू...." निशा जोर से बोली.
"क्या हुआ क्यों मेरे नाती पर चिल्ला रही हो ?"
"मम्मी जी चिंटू बहुत बतमीज हो गया है."
"मेरी बेटी और नाती दो चार दिन के लिए आते है तो तुमसे देखा नही जाता.छोटे बच्चे ऐसे चिल्लाते है क्या ?"
"मम्मी जी ये सब आपके लाड प्यार का नतीजा है.अपने से बड़ो से बोलने की तमीज भूलता जा रहा है."
"भाभी तमीज तो आपको नही है.मम्मी से कैसे बात कर रही हो."
"क्या हुआ ? इतना हंगामा क्यों हो रहा है ? लोगा नये साल आने की खुशी में पार्टी करने की तैयारियां कर रहे है और यहाँ हंगामा हो रहा है." रजत ऑफिस से आते हुए बोला.
"ये अपनी बीबी से पूछ.अब तो इसे चिंटू भी अखरने लगा है.क्या हुआ जो चिंटू ने कुछ कह दिया."
"निशा चिंटू छोटा बच्चा है.उसकी बात का क्या बुरा मानना."
"इस छोटे बच्चे ने क्या बोला है जरा सुन तो लीजिए."
"निशा छोटी छोटी बातों को खींचने से घर का माहौल खराब होता है.छोड़ ये सब.जा कर चाय बनाओ."
"नही रजत आज नही.आज आपको मेरी सारी बातें सुननी पड़ेगी.मम्मी जी मुझे जली कटी सुनाती रही मैंने बुरा नही माना. रमा छोटी हो कर मुझे ही चार बातें सुना देती तब भी मैं चुप रही.रजत लव मैरिज हम दोनों की फिर सजा मुझे ही क्यों ? मैं ही क्यों सबकी नाराजगी और गुस्सा झेलती रहूँ ? आप को कभी किसी ने कुछ नही बोला.आप कहते रहे मम्मी बाहर से कठोर है लेकिन दिल की बहुत अच्छी है.कुछ वक्त बाद मम्मी का गुस्सा शांत हो जायेगा. उनकी बातों को दिल से मत लगाओ. मैं भी इस उम्मीद में जीती रही कि एक दिन मम्मी जी मुझे अपनी बहू मान लेगी पर नही उनके लिए तो मैं काम करने वाली नौकरानी हूँ. जिसको जब मर्जी,जो मर्जी सुना दो.लेकिन आज छोटा बच्चा मुझे ही दो बातें सुना रहा है तब भी मम्मी जी को इसमें कुछ गलत दिखाई नही दे रहा.अब बहुत हो गया.सुना था पलट कर जवाब देना गलत है पर सुनते रहो तो लोग बोलने की हद भूल जाते है. आज देख भी लिया.ये मेरी गलती है मैं सब सुनती रही. लेकिन अब घर के बच्चे भी बोलने लगे है. इसलिए अब से मैं किसी की गलत बात नही सहूंगी फिर कोई ये न बोले की बड़ो से जवाब लड़ती है."
चुप रहने वाली निशा ने आज अपने मन की सारी भड़ास निकाल दी जो उसने दो साल से अपने मन में दबा कर रखी थी.
"चिंटू जाओ,मामी से सॉरी बोलो.सासूमां बोली.
"सॉरी मामी" निशा ने चिंटू को गले लगा लिया.
"बहू मुझे भी माफ कर दे.इस नये साल में मैं तुमसे वादा करती हूँ कि कभी तुम्हारे मन को नही दुखाऊंगी और उम्मीद करती हूँ कि आने वाला नया साल बीते साल की कड़वाहट भूला कर खुशियां और रिश्तों की मिठास ले कर आयेगा." कहते हुए सासूमां ने निशा को गले लगा लिया.
बाहर नये साल के जश्न में पटाखे फूट रहे थे.पटाखों की रोशनी ने सास बहू के मन में एक दूसरे के लिए प्यार और विश्वास की लौ जला दी.
शशि ध्यानी
दिल्ली
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