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इंसान का व्यवहार ही असली खूबसूरती है शक्ल तो उम्र के साथ बदल जाती है

 "आरती जल्दी करो.शादी में जाने के लिए देर हो रही है." रजत कोट पहनते हुए बोला.

"बस पांच मिनट." आरती अपने को शीशे में निहारते हुए बोली.

"हे भगवान झुर्रियां. मैंनें कभी ध्यान से देखा ही नही.अपनी उम्र से बड़ी लग रही हूँ."उसका मन उदास हो गया.आज बहुत समय बाद उसने इतने गौर से अपने आप को शीशे में निहारा था.नही तो सास,ससुर बच्चों के बीच उसे कभी ढग से आईना देखने तक की फुर्सत नही होती थी.

"आरती क्या हुआ.इतनी देर से खुद को निहार रही हो.अपने को खुद की नजर ही लगावोगी क्या ?"

"इन झुरियों वाले चेहरे पर मेरी क्या किसी की भी नजर नही लगेगी." आंखो के पास फाउंडेशन लगाते हुए बोली.

"ऐसा क्यों बोल रही हो ?"

"क्या आपको मेरे चेहरे पर ये झुर्रियां नही दिख रही ?"

"मेरी प्यारी बीबी ये झुर्रियां नही तुम्हारे अनुभव,समर्पण की निशानी है.तुमने हमारी गृहस्थी को संभाला,बच्चों को अच्छी परवरिश दी.हर सुख दुख में मेरे साथ रही. उम्र तो बढ़ेगी ही है और अपना असर भी दिखायेगी तो उससे कैसा घबराना."

"लेकिन अभी से झुर्रियां.कही आपका प्यार कम हो गया तो ??" आशंकित होते हुए आरती बोली.

"मेरे भी तो बाल कम हो गये.पेट भी निकल आया है तो क्या तुम मुझे पसंद नही करती. जब हम किसी से प्यार करते है तो उसकी बाहरी नही आंतरिक सुंदर को भी चाहते है.समय के साथ तन अपनी सुंदरता खो सकता है पर मन की सुंदरता हमेशा बनी रहती है.सब तुमसे कितना प्यार करते है. मम्मी मेरी बहू ये,मेरी बहू कहते नही थकती. पापा जी बेटी बेटी करते रहते है. बच्चे के लिए तुम दुनिया की सबसे अच्छी मम्मी हो और मेरे लिए दुनिया की सबसे खूबसूरत और नेकदिल पत्नी.सब रिश्तेदार तुम्हारी तारीफ करते रहते है.क्योंकि तुम्हारे व्यवहार,संस्कार तुम्हें सबसे अलग बनाते है.

इंसान का व्यवहार ही असली खूबसूरती है,शक्ल तो उम्र के साथ बदल जाती है."

"तो क्या आपको इन झुर्रियां से परेशानी नही."

"बिल्कुल नही.ये झुर्रियां हमारे तीस साल के साथ,प्यार, विश्वास और तुम्हारे हम सब के प्रति समर्पण की निशानी है ये शर्म की बात नही गर्व की बात है." रजत ने आरती को बाहों में भरते हुए कहा.

रजत के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर आरती के गाल लाल हो गये.

"अच्छा अब छोड़ो भी मुझे तैयार होना है."

रजत की बातों से आरती के मन की दुविधा दूर हो गई.उसने झुर्रियों को मेकअप से छुपाने की कोशिश करनी छोड़ दी.

शशि ध्यानी

दिल्ली


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