ढीठ हो तुम ! इतना बेइज्जत होने के बाद भी नहीं जाती हो मेरे घर से ? ऐसी गंवार - देहाती औरत से शादी हुआ है कि आज तक पछताए जा रहा हूं, आलोक का पुराण व बकबक जारी रहता है और मैं सुनते सुनते पकती रहती हूं, । रोज का वाचन है आलोक का। जब से शादी हुई है , मुझे अंडरइस्टिमेट करता रहता है , मेरी वजूद को तार - तार ?घर की मुर्गी दाल बराबर !( दरअसल आलोक को जींस पैंट - टी शर्ट पहनने वाली बहुत अच्छी लगती, बल्कि साड़ी सलवार सूट पहनना पसंद है मुझे। शालीनता का एहसास होता है।)
अंकिता की शादी हुई है आलोक से , क्लर्क है बैंक में । कई बार प्रोमोशन हेतु ऑफिसर बनाए जाने वाला परीक्षा में बैठा है, नहीं हो सका है चयन ? इसका भी ठीकरा फोड़ता है मेरे सर पर , कि तुम पढ़ने नहीं देती हो, तुम मेरे लिए बदकिस्मत हो , वगैरह वगैरह।
कई बार सस्पैंड हो चूका है बदतमीजी के लिए, अपनी वाचालता हेतु!!!!!!
मेरे ससुर जी बैंक में ही बहुत बड़े पोस्ट पर थे , आलोक महोदय को ग्रेजुएशन करने के पश्चात बिजनेस करने की प्रबल इच्छा रही थी? ससुरजी बैंक के क्लर्क की परीक्षा को जिद कर के दिलवाए कि हमलोग ब्राह्मण हैं , हमलोगों के बूते और वश का नहीं है व्यापार करना ?
क्लर्क की नौकरी मिली, हम सब वहीं शिफ्ट हो गए, आलोक की पोस्टिंग वाले शहर में, बाद में एक महीने के बाद ससुरजी सास पैतृक आवास में रहने चले गए हैं ।
बैंक तो जाता रहा है पापाजी के डर से, पर वहां भी बैंक मैंनेजर से झगड़ बैठा है, किसी कस्टमर के शिकायत पर , अब घर पर बैठा हुआ है , बकबक करना चालू ही रहता है । क्योंकि "खाली दिमाग शैतान का "।
बाजार में सब्जी का मोल भाव कर रही , कि किसी की जानी पहचानी सी आवाज कान में आती है , अंकिता!तुम यहां कैसे ? पलटी तो सामने विशाल खड़ा है अपना सब्जी का थैला लिए। विशाल को देखते ही खुश हो गई हूं , काॅलेज में दो साल सीनियर और हमदोनों के प्यार के किस्से मशहूर थे लैला मजनूं के माकिफ। एक दूजे को देख आंखे खुशी में नम हो गई हैं।
हे भगवान !
विशाल को बाजार से अपने घर जबरदस्ती ले आई मैं, चलो न नजदीक में है मेरा घर । आलोक दरवाजा खोलता है , विशाल को देख , अरे सर आप यहां !, सामने से आकर बताई ,कि यह मेरे काॅलेज के दोस्त हैं, बाजार में मिले हैं , इसलिए ले कर आई हूं आपसे मिलवाने के लिए।
ओह हो , आईये न सर !
चाय पीकर चला गया विशाल। सोचती रही मैं आलोक कैसे विशाल को जानता है ? न मैंने पूछा विशाल से , न आलोक पूछ रहा है मुझसे?
खैर !
दूसरे दिन आलोक आया किचन में, अंकिता जानती हो ? कौन हैं ये , यही हमारे बैंक के मैंनेजर हैं विशाल सिन्हा । इन्होंने ने ही मुझे सस्पेंड किया हुआ है?
मैं सुनती रही चुपचाप, आज आलोक मेरे सिर पर कोई ठीकरा फोड़ने नहीं बल्कि यह बताने आया कि मेरा बाॅस है विशाल ।
बिचारा विशाल मेरे पापा से मेरा हाथ मांगने भी गया था? पर हम ठहरे कट्टर ब्राह्मण परिवार। , हमारे यहां कभी अंडा तक नहीं बना, मीट मछली का बनना बहुत दूर की बात है । इसका परिवार कायस्थ ठहरा, जहां बिना चिकन मीट खाए नहीं रह सकते ।खान-पान की बात नहीं थी , आड़े आ रही थी जातिवाद। भला पापा कैसे मानते , विशाल को बाहर का रास्ता दिखाकर सख्त स्वर में बोले कि मेरी बेटी जिंदगी भर कुवांरी रहेगी , पर तुमसे शादी हरगिज नहीं हो सकती, दफा हो जाओ यहां से।
खून की आंसु बहाती रह गई मैं , हमारा प्यार कुर्बान हो गया है जमाने के लिए भेंट स्वरूप, बाद में आलोक के साथ सात फेरे ।
आलोक के बड़बोलापन से आहत रहती , चिढ़ती रहती , हर चीज के लिए दूसरे को दोषारोपण करना , जलील करना आम बात है इसके लिए।
अब घर बैठा है, तनख्वाह भी आधी हो गई है । समय का तकाजा ही है या भगवान की अद्भुत लीला, दोबारा किस्मत से विशाल का मिलना।
एक महीना बीत चूका है , बैंक से आलोक के लिए फोन आता है , कि कल आकर जाॅइन करे।
बहुत खुश है आलोक।
मैं समझ गई कि विशाल ने ही शिकायत दर्ज को कैंसिल कर के वापस बुला लिया है ।
तैयार हो कर बैंक चला जाता है आलोक ! कुछ देर में विशाल का फोन आता है , अंकिता कैसी हो तुम ? ठीकठाक __ . हू हू अपना बताओ , अच्छा भला हूं बस !
अच्छी बात है , हम फिर से मिल गए हैं विशाल , पर एक रिक्वेस्ट है, मानोगे न !
हां हां बोलो न , तुम आलोक से हमदोनों के अतीत के बारे मत बताना ? नहीं तो मेरा जीना हराम कर देगा ?
कदाचित नहीं! निश्चिंत रहो। समझ गया मैं!
आलोक के बारे में सोच रही हूं कि ऐसे स्वभाव वाले आदमी के साथ निर्वाह करना ही है , जिसे औरों के भावना का आभास तक नहीं , वो किसी का ख्याल क्या रखेगा?
मेरी किस्मत का लेखा जोखा ही है या समझो मेरी खुशकिस्मती कि भगवान ने विशाल को फिर से मेरी जिंदगी में वापस भेजा है उसी शहर में , जहां आलोक की पोस्टिंग है, आलोक अब पंगा नहीं लेगा बैंक में किसी से ? शायद मुझसे भी नहीं?
जानता है मेरी पत्नी का दोस्त है उसका बाॅस!
"अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे!!!!!"
"""""प्यार किसी से शादी किसी और से , यही हमारे देश का सामाजिक ढांचा है, अभी भी मीडिल क्लास फैमिली के लोग पारंपरिक विवाह को ही तवज्जो देते हैं ।""""
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