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खामोश निर्णय

 बारिश शुरु हो गयी थी राजीव ने स्कूटर की गति तेज कर दी ताकि तेज बारिश आने के पहले घर पहुंच जाए। पुलिया संकरी थी सामने से दूसरी गाड़ी को आते देख ब्रेक लगाया पर गाड़ी फिसल गई और वह पुलिया से जा टकराया सिर में  गंभीर चोट आने से अस्पताल में लाया गया राजीव की पत्नी दिव्या से डॉ ने कहा  देखिए स्थिति काफी गंभीर है हम पूरी कोशिश करेगें पर कुछ कह नहीं सकते।

अपने आपको संभालते हुए जी आप आपरेशन की फार्मेलिटी पूरी कीजिए।

बच्चे और रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंच गए थे।आपरेशन थियेटर से निकलते ही डॉ बोले सॉरी हम उन्हें नहीं बचा पाए।और पुनः आपरेशन थियेटर के अंदर चले गये।

अचानक हुए हादसे से सभी सकते में थे।दिव्या को राजीव की स्थिति देखते हुए यह अनुमान तो लग ही गया था वह शांत थी। बाहर बारिश अभी भी हो रही थी पर वह अपने अंदर की बारिश को रोके थी।

माँ पापा ने देहदान का फार्म भरा था तो क्यों न हम इसी अस्पताल में देहदान कर दे।

वह फार्म मैंने कैसिंल कर दिया।दिव्या ने कहा ।

इस समय माँ से बहस नहीं कर सकते थे।आपस में ही बाते करते हुए।

पापा की अंतिम इच्छा भी नहीं मानी माँ ने

भैया हो सकता है माँ सोच रही हो दाहसंस्कार बिना पापा की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।

अगर ऐसा था तो फार्म भरते समय माँ ने पापा को क्यों नहीं रोका।

दो घंटे से ज्यादा हो गये अभी तक बॉडी नहीं दी।तभी वार्ड वॉय आपरेशन थियेटर से सफेद कपड़े से ढ़की बॉडी देते हुए बोला आप इसे ले जा सकते हैं।

बच्चों ने एक बार पुनः माँ की ओर देखा।तभी डॉ ने माँ से कहा आपकी वजह से आज चार लोगों को जीवनदान मिल गया आँखे आई बैंक में रख दी गई है।जल्दी ही दो लोग आपके पति की आँखों से दुनिया देखेंगे।

डॉ आप किसकी क्या बात कर रहे हम समझ नहीं पाये बच्चों ने कहा

आपकी माँ ने देहदान को अंगदान में बदल दिया था लेकिन क्यों।

देहदान तब ठीक है जब आपके दूसरे अंग ठीक काम न कर रहे हो।पर आपके पापा तो यंग थे सबसे अच्छी बात उनके सभी अंग पूरी तरह स्वस्थ थे।ऐसा बहुत कम लोग सोचते हैं जबकि इस समय अंगों की जरूरत ज्यादा है। वो मरकर भी छःलोगों में जीवित रहेंगे.


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