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माँ के आँसू

 ये कहानी है  आनंद और उसकी माँ की ।

एक लड़का जो बहुत अच्छे नंबरों से पास हुआ, नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगा। जहाँ भी जाता किसी ना किसी कमी की वजह से निकाल दिया जाता। शायद उसकी किस्मत उसे कहीं और लेकर जाना चाहती थी। कुछ महीनों के बाद पता चला कि एक कंपनी में मैनेजर की एक पोस्ट खाली है। बिना देरी किये पहुँच गया इंटरव्यू देने के लिए। लेकिन जाने के बाद पता लगा कि पोस्ट एक और पाने वाले बहुत सारे।

पहले ही निराश हो गया लेकिन सोचा जब इतनी दूर आया हूँ तो क्यो ना इंटरव्यू तो दे ही दु। जब उसका नंबर आया तो उससे पूछा तुम्हारा नाम, पिताजी क्या करते है। सारे सर्टिफिकेट्स देखें, मन ही मन उसे जॉब देने के बारे में सोच चुके थे। लेकिन जब उसने अपने पिताजी के बारे में बताया कि उनका तो बचपन में ही देहांत हो गया। जिसकी वजह से हमारे घर की नींव टूट चुकी थी। लेकिन माँ ने कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी। सिलाई करके, कपड़े धोकर मुझे इस काबिल बना दिया कि आज में आपके सामने बैठा हूँ। मुझे याद नहीं कभी मुझे किसी चीज़ की कमी हुई होगी। हर रोज़ मेरी माँ मुझे एक ही बात कहती थी कि बेटा तुम्हे बड़ा आदमी बनना है।

ऐसा काम कर जाओ जिंदगी में की, तुम्हारे होने की वजह से लोगो की जिंदगी सुधर जाए। कंपनी के  मालिक ने कहा ठीक है मेरा एक काम करो। आज घर जाने के बाद अपनी माँ को अपने हाथों से खाना खिलाना और जब वो खाना बना रही हो तो उसकी मदद करना। लड़के को ये बात समझ नहीं आई कि ऐसा क्यों कहा मालिक ने। लेकिन घर जाकर वो दोनों काम किये आनन्द ने, तो उसे पता लगा। जैसे ही उसने वो सब देखा तो उसका दिल दहल गया। उसकी माँ के हाथों में छाले पड़े हुए थे। हाथ लगाने से भी दर्द महसूस हो रहा था। लेकिन कभी माँ ने दर्द के बारे में बताया ही नहीं।

मेरी माँ की ऐसी हालत का में खुद जिम्मेदार हूँ जिसने कभी उनकी किसी काम में मदद ही नहीं कि। माँ ने हमेशा यहीं कहा बस तुम मन लगाकर पढ़ते रहो। बाकी काम में खुद देख लुंगी। खाना खिलाते-खिलाते उसकी आँखों से आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उसकी आत्मा रो रही थी कि जाने-अनजाने में माँ को कितने दुःख दिए मैंने। लेकिन माँ फिर भी समझाये जा रही थी बेटा कुछ नहीं हुआ मुझे में तो बिल्कुल ठीक हूँ। लेकिन उस दिन आनंद की आत्मा रो रही थी और उसे चीख-चीखकर एक ही बात बोल रही थी माता  की ऐसी हालत का सिर्फ तू ही जिम्मेंदार है। उस दिन बस यहीं सोच-सोचकर रोता रहा कि, माँ ने मेरे लिए अपनी जिंदगी न्यौछावर कर दी।

कितना दर्द झेला उन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुँचाने के लिए। हर रोज़ उन्ही हाथों से कपड़े, और खाना बनाने से कितना दर्द बर्दाश्त किया होगा उन्होंने। ये सोच-सोचकर आनंद की आँखे रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। अगले दिन जब कंपनी में गया तो मालिक के सामने रोने लगा गया बोला कि आज आपकी वजह से मुझे पता लगा कि मेरी माँ ने मेरे लिए क्या कुर्बानी दी है। मुझे तो कभी पता ही नहीं लगता अगर आप नहीं होते तो। मालिक ने कहा आनंद रोना बन्द करो और सुनो मेरी बात, तुम्हारी माँ ने जो तुम्हारे लिए किया है उसको कभी व्यर्थ मत जाने देना क्योंकि उस माँ ने अपना सब कुछ त्यागकर, हर रोज़ दर्दनाक जिंदगी जीने के बाद तुम्हे इस काबिल बना पाई है।

इसलिए अब तुम्हारा भी फ़र्ज़ बनता है कि तुम्हारी माँ को अब किसी चीज़ की कमी ना हो। ऐसा कोई भी काम मत करना जिस से उनकी आँखों में आँसु आये और हाँ अपनी माँ के हर काम में हाथ बंटाना। जितना हो सकें आप उनके आराम से जिंदगी जीने के दिन आ चुके। ध्यान रखना की उन्हें कोई भी काम न करना पड़े। आखिर कब तक इस दर्द को बर्दाश्त कर पाई बेचारी माँ। जाओ तुम्हे सेलेक्ट कर लिया, हमें उम्मीद है तुम अपनी माँ की दी शिक्षा पर खरे उतरोगे।


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