बहुत पुरानी बात है।सिया की शादी बहुत ही अमीर घर में होती है ।वहाँ बहुत सारे नौकर चाकर रहते हैं ।घर में धन-संपत्ति की कोई कमी नहीं रहती है ।घर में गाय भी रहती है ।सिया रोज सुबह गाय के गोबर से कंठे बनाती थी ।उसके सास-ससुर और पति उसे हमेशा मना करते थे कि इतने सारे नौकर चाकर हैं वह कंठे बना देंगे ।लेकिन फिर भी सिया रोज कंठे बनाती थी और सूखने पर एक कमरे में रखती थी। उस कमरे में कोई आते जाते नहीं थे।
समय बीतता जाता है, लेकिन सिया नियमित कंठे बनाती ही थी। एक दिन उनके घर में बहुत बड़ी चोरी हो जाती है ।चोर तिजोरी से सारा धन संपत्ति चुरा कर ले जाते हैं । सिया के ससुर और पति बहुत चिंतित रहते हैं कि आगे व्यापार कैसे चलेगा। उन्हें कोई उधार देने को भी तैयार नहीं होता है। तब सिया उनके पास जाकर कहती है कि आप लोग चिंता मत कीजिए हमारे पास कुछ धन सुरक्षित है ।उसके पति और ससुर को बहुत आश्चर्य होता है की तिजोरी से सारे गहने और अशर्फियाँ तो चोर चुरा कर ले गए हैं। फिर धन कहाँ है । तब सिया उनको लेकर कंठे वाले कमरे में जाती है और एक कंडा तोड़कर दिखाती है ।कंठे के अंदर से सोने की अशर्फी निकलती है ।उसके ससुर जी और पति बहुत प्रसन्न होते हैं। तब सिया उन्हें बताती है कि उसके माता-पिता हमेशा उसे सीख देते थे कि विपत्ति कभी भी आ सकती है ,हमें सावधानी रखनी चाहिए। इसलिए सिया सबके मना करने पर भी रोज कंठे बनाती थी और 1-1 अशर्फी उसमें छिपा देती थी ।चोरों को तो अंदाजा भी नहीं था कि कंठे के कमरे में इतनी सारी अशर्फियाँ हैं। वैसे भी कंठे चुराने की चीज नहीं है। इस तरह सिया अपने माता पिता से मिली सीख और अपनी समझदारी से धन को विपत्ति काल के लिए सुरक्षित रखती है।
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