यूँ तो अक्षय के पीछे कॉलेज की सुंदर रंगबिरंगी तितलियाँ हमेशा ही मड़राती रहती है। सभी लड़कियाँ उसका सानिध्य पाने लालायित रहती है। एक तो पैसे वाला बाप का इकलौता लड़का, ऊपर से कॉलेज का हीरो। कौन लड़की नहीं चाहेगी उसकी हीरोइन बनना। लड़कियाँ ही नहीं लड़के भी उसके दीवाने थे। पर कॉलेज की एक लड़की रिया सब लड़कियों से अलग थी। उसे अक्षय से दोस्ती करने में कोई रुचि नहीं थी। रिया सांवली किन्तु तीखे नयन नक्श वाली सादगी की मूरत थी। लेकिन खूबसूरत, मनमोहक मुस्कान वाली रिया पहली ही नजर में अक्षय को भा गई। लेकिन रिया का उसमें कोई दिलचस्पी न लेना अक्षय को आश्चर्यचकित कर रहा था।
वैसे कालेज के कई लड़के रिया से प्रभावित थे,पर रिया किसी से भी बात नहीं करती थी, बस मुस्कुरा कर पूंछे गये सवालों का जवाब दे दिया करती थीं। अक्षय के दिलोदिमाग में रिया ही छाई रहती वह किसी भी तरह उससे दोस्ती करने को उतावला था। अक्षय की रिया के प्रति दीवानगी लोगों से छिपी न थी। क्लास के अलावा रिया का अधिकांश समय लाइब्रेरी में ही बीतता था। अक्षय भी लाइब्रेरी गया पर रिया ने तो आँख उठाकर उसकी तरफ देखा तक नहीं, अपनी पढ़ाई में ही व्यस्त रही सहेलियों ने जब रिया से इस संबंध में बात की तो उसका जवाब था "प्यार मुहब्बत मौज-मस्ती के लिए तो जिन्दगी पड़ी है। कॉलेज तो वह पढ़ाई और कैरियर बनाने के लिए आई है।"
जब से लड़कियों को यह पता चला कि अक्षय रिया को पसंद करता है तो लड़कियों को उससे जलन भी होने लगी थी। और रिया से कोई लड़का बात करें या उसके समीप भी पहुंचे यह बात अक्षय को सहन नहीं हो पाती थी इसी बात को लेकर कई बार उसकी कई लड़कों से तू- तू मैं- मैं भी हो चुकी थी
कुछ दिन पहले ही वाद-विवाद प्रतियोगिता में विपक्ष में बोलने वाली रिया के तीखे तेवर से सभी हैरान थे। कम बोलने वाली और इतना अच्छा बोलेगी लोगों को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था। आखिर विजयी भी वही हुई।
और आज तो एकल गान में उसकी सुमधुर आवाज से पूरे हाल में पिन ड्राप सायलेंस हो गया,अक्षय तो ऐसा खोया कि ताली बजाना ही भूल गया। जब होश आया तो सिर्फ उसकी ताली की आवाज आ रही थी
अब और नहीं आज रिया से अपने दिल की बात कह के ही रहूंगा दिन रात उसके बारे सोचते हुए कहीं मैं पागल न हो जाऊं,सभी रिया को उसकी जीत की बधाइयां दे रहे थे हिम्मत करके अक्षय भी जीत की बधाई देने पहुंचा,
"बहुत बहुत बधाई हो रिया, आपकी आवाज में मैं तो खो ही गया था रियली वैरी स्वीट वाॅइस" और हाथ आगे बढ़ाया
परंतु रिया ने अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए मुस्कुरा कर "थैंक्स "कहा और आगे बढ़ गयी।
अक्षय ने रोकते हुए कहा,"मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं"
"कहिए"
क्या? तुम हमारे साथ केंटीन में एक कप चाय पी सकती हो।"
"मैं चाय नहीं पीती।" वह चलते हुए बोली
"रुकिए तो जरा"
" आपको को जो कहना है कहिए मैं सुन रही हूँ "
"क्या हम दोस्त बन सकते हैं ? आई लव यू"
रिया चौंककर पीछे देखती है, रुक कर पूछतीं है " कॉलेज में तो आपको दोस्तों की कोई कमी नहीं है। फिर आपने मुझमें ऐसा क्या देखा ? जबकि आपके तो आगे पीछे तो कालेज की सभी लड़कियाँ रहती है,जो मुझसे ज्यादा खूबसूरत हैं।"
" तुम्हारी सादगी, आत्मविश्वास पढा़ई के साथ दूसरी गतिविधियों में शामिल होना और जीतना भी आज तो मैं तुम्हारी मधुर आवाज का फैन भी हो गया हूँ।"
"चलिए मैं क्यों पसंद हूँ यह तो बता दिया लेकिन आप में ऐसा क्या है ? जो मैं आपको पसंद करुँ, आपकी अपनी पहचान क्या है?
यें ब्रांडेड कपड़े जो आपके पापा के दिए हुए हैं या वो मँहगी गिफ्ट, जिसे देकर तुम दोस्तों को खुश करते हो या ये मँहगी गाड़ियाँ जिसको देखकर लड़कियाँ इम्प्रेस होती है। ये सब तो आपके पापा की कमाई का है आपका अपना क्या है ?"
"क्या पापा के पैसे पर मेरा हक नहीं है ?"
"बिलकुल है ! पर एक सीमा तक, आप तो न ही पढ़ाई में ध्यान देते हो और तो और दो-दो साल में एक क्लास पास करते हो, किसी खेलकूद या कोई सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग भी नहीं लेते हो, सिर्फ अपनी रईसी का दिखावा करते हो,आखिर आपका अपना वजूद क्या है ?"
"क्या मतलब ?"
"साॅरी! पहले अपनी पहचान बनाओ। ऐसे गुमनाम शख्स से भला कोई क्यों दोस्ती करेगा, जो कुछ भी आप मुझे में देख रहे हो वही मैं अपने दोस्त में देखना चाहूँगी कहती हुई तेजी से आगे बढ़ गयी ।"
अक्षय ठगा सा उसे जाता देखता रहा,उसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि रिया उसे न भी कह सकती है
तीन रातों से वह न तो ढंग से सो पाया है और न ही खा पा रहा है उसके कानों में बस एक ही आवाज गूंज रही है। "आखिर आपका वजूद क्या है ?" इस बात को वह सहन नहीं कर पा रहा था
वह अपने कानों पर हाथ रखकर जोर से बोलता है "नहीं और नहीं मैं अपनी पहचान बनाऊंगा।" और जुट जाता है पढ़ाई में, जैसे ही मन भटकता है वही आवाज फिर सुनाई देती है। और पुनः लक्ष्य पाने को दृढ़ संकल्पित हो जाता है।
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