बड़े से संयुक्त परिवार की तीसरी पीढ़ी की दूसरी बनने का सौभाग्य मिला दीपा को।एक अदद जेठ-जेठानी। दो दो दादी सासें । ढेर भर सास ससुर ननदें और देवर। सबकेसाथ खूब मस्ती करती दीपा।
पर शादी के मात्र एक महीने बाद ही पति रोमी के साथ पूना चली गई दीपा। वहाँ भी परिवार का ही एक देवर प्रियम उन दोनोंके ही साथ ही रहता था ।
फिर आई दीपा की पहली दीपावली।
पूरा परिवार फिर से इकट्ठा हुआ। दीपावली के दिन दीपोत्सव के बाद घण्टे दो घण्टे फ़ोटो सेशन चला।फिर सब इकट्ठा हुए ताई के कमरे में जो कि सबका पसंदीदा बैठक स्थल था । पलंग, सोफा, कुर्सी,टेबल,फर्श , देहरी जिसको जहां जगह मिली सब बैठ गएऔर निश्चय हुआ "दमसरास" खेलने का।
सभी सासें मौजूद थीं लेकिन सभी ससुर विश्राम करने चले गए थे।
जेठ थे लेकिन जिठानी की तबियत ठीक न होने से वो भी अपने कमरे में ही थी। बाकी सब ननदें और देवर तो अविवाहित ही थे।कहने का मतलब यह कि इतने सारे लोगों में पति पत्नी की एकमात्र जोड़ी दीपा और रोमी ही की उपस्थित थी। खैर खूब चुहलबाजी और हंसीमजाक के साथ खेल खेला जा रहा था। फिर बारी आई सबसे छोटे देवर अभि की, जो कि सामान्यतः घरमें लगने वाली ऐसी महफिलों का हिस्सा नहीं बनता था, थोड़ा अंतर्मुखी होनेकेकारण किसीसे भीज्यादा बातचीत करता नहीं था। फिल्म के नाम का संकेत देने के लिए उसने रोमी की तरफ़ इशारा किया, फिर दीपा की तरफ,और फिर प्रियम की तरफ। रोमी के बाद विवाह के लिए अब प्रियम का ही नम्बर था।तो सबने विवाह से सम्बन्धित फिल्मोंके कयास लगाना शुरू किये लेकिन बात बनती नजरनहीं आई।सभी कयासों को नकारता अभि था कि बार बार रोमी ,दीपा और प्रियम की ओर इशारा करनेके अलावा कोई और संकेत दे नहीं रहा था। सब बड़ी उलझन में थे। अचानक दीपा ने कयास लगाया "पति, पत्नीऔर वो"??
अब अभि ने स्वीकृति में सिर हिलाया।
एक क्षणकेलिए तो सभीने उलझन भरी नजरोंसे एकदूसरेको देखा
दूसरे ही क्षण बात समझ आते ही सबकी हंसी का फव्वारा फूट पड़ा।
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