आरती अपनी सास दमयंती के कहने पर अपने पति के स्वागत के लिए आरती की थाली तैयार कर रही थी। कुछ दिनों पहले ही आरती की शादी धूमधाम से उनके बेटे अनिल के साथ हुई थी शादी के बाद जब वह अपने माता-पिता से विदा लेकर अपने पति के साथ ससुराल की तरफ आ रही थी तभी अचानक रास्ते में एक पेड़ से गाड़ी टकरा जाने के कारण उसके पति और बुआ सास के लड़के के सिर में चोट लग गई थी। जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था।
आरती उस हादसे में बाल-बाल बच गई थी वह तो जी भर के अपने पति का मुख देख भी ना पाई थी कि तभी यह दुर्घटना घट गई। अब उसके पति और बुआ सास के लड़के की तबीयत बिल्कुल ठीक थी। जिसके कारण आज उसके पति अस्पताल से छुट्टी लेकर घर आ रहे थे बेटे के अस्पताल से ठीक होकर आने की खुशी में आरती की सास ने बेटे के स्वागत के लिए आरती से थाली सजाने को कहा था ।
जब आरती पति के स्वागत के लिए थाली सजा रही थी तभी उसकी बुआ सास उसकी सास से बोली 'भाभी! आप बहु से आरती का थाल सजवाकर फिर से घर में अपशकुन फैलाना चाहती हो? पहले ही इसके कारण दोनों भाई मौत के मुंह में पहुंच गए थे। अब फिर से इसके हाथों से आरती का थाल सजवाकर उनका जीवन संकट में डालना चाहती हो?'
बुआ सास की बात सुनते ही आरती की आंखों में आंसुओं की धारा बह चली थी। तभी उसकी सास बुआ सास से बोली 'दीदी! यह क्या कह रही हो आप? एक्सीडेंट मेरी बहू के अपशकुनी होने के कारण नहीं आपके बेटे के कारण हुआ था। जिसने गाड़ी चलाते वक्त जरूरत से ज्यादा शराब पी रखी थी। आरती ने जब उसे शराब के नशे में देखा तब अनिल से कहा भी था "कि आप भैया से गाड़ी मत चलवाओ इस वक्त यह बहुत नशे में है। ऐसी हालत में गाड़ी चलाने से कोई दुर्घटना भी हो सकती है।"
तब अनिल ने आपके बेटे को गाड़ी चलाने से बहुत रोका परंतु, वह माना नहीं जिद करने लगा की गाड़ी तो मैं ही चलाऊंगा। भाभी को पहली बार घर लेकर मैं ही जाऊंगा। अनिल के बार-बार मना करने के बावजूद भी जब वह नहीं माना तब मजबूर होकर अनिल को उसे गाड़ी चलाने की इजाजत देनी पड़ी। आपके बेटे गाड़ी चला कर घर की तरफ आ रहे थे तब ज्यादा नशे के कारण उसकी लापरवाही से रास्ते में खड़ी एक गाड़ी से उनकी टक्कर हो गई थी जिसके कारण दोनों के सिर में चोट लग गई थी वह तो शुक्र करो भगवान का की आरती को कोई चोट नहीं लगी और उसे गाड़ी भी चलानी आती थी।
जिससे वह बगैर घबराए दोनों को तुरंत अस्पताल लेकर पहुंची नहीं तो देर होने के कारण ज्यादा खून बहने से उनकी जान भी जा सकती थीं मुझे यह सब जानकारी थोड़ी देर पहले ही फोन पर आपके बेटे ने दी थी अपनी गलती पर शर्मिंदा होने के कारण वह अस्पताल से छुट्टी लेकर सीधे अपने घर चला गया यहां भी नहीं आया दीदी यदि में चाहती तो उसे शराब पीने के लिए डांट भी सकती थी लेकिन मैं किसी की जिंदगी में दखल देना पसंद नहीं करती कोई अपनी जिंदगी कैसे भी जिए परंतु, किसी के कारण मेरी बहू के सम्मान पर आच आए यह मुझे मंजूर नहीं मेरी बहू अपशकुनी नहीं अन्नपूर्णा है आज मेरी बहू के कारण ही मेरे बेटे से मेरा पुनर्मिलन हो रहा है सोचो यदि उस दिन बहू गाड़ी में नहीं होती तो ना जाने क्या अनर्थ हो जाता काश !आप मेरी बहु पर आरोप लगाने से पहले अपने बेटे को सुधारने के बारे में सोचती तो कितना अच्छा होता।
दमयंती की बातें सुनकर उसकी ननंद शर्मिंदा हो गई थी वह पश्चाताप भरे स्वर में आरती से बोली" बहु माफ कर दो मैंने अपने बेटे की गलती जाने बगैर तुझे अपशकुनी कह दिया बहू तुम अपशकुनी नहीं अन्नपूर्णा हो जिसने दो घरों के चिराग बचाकर घर को खुशियों से भर दिया।" यह सुनकर आरती मुस्कुराते हुए बोली" बुआ जी मुझसे माफी मांग कर मुझे शर्मिंदा ना करें आपको क्या पता जब शादी से अगले दिन ही किसी का पति अस्पताल में पहुंच जाए जो औरत के दिल पर क्या बीतती है दुख के कारण उसकी तो आंखों से नींद ही उड़ जाती है परंतु, मुझे खुशी है मेरी सास ने मेरे सम्मान की रक्षा करके मेरा साथ दिया सच कहूं तो आज का दिन मेरे लिए बेहद खुशी का दिन है क्योंकि आज मुझे सास के रूप में मां मिली है इसलिए आज एक बेटी का मां से पत्नी का पति से और मां का बेटे से पुनर्मिलन का दिन है मैं इस दिन को यादगार बनाना चाहती हूँ ।
तभी दरवाजे पर गाड़ी आकर रुकी जब गाड़ी से अनिल नीचे उतरा तो दमयंती आरती से बोली" बहू स्वागत कर अपने पति का।" जब आरती ने पति का स्वागत करने के बाद उनके चरण छूने चाहे तब अनिल ने अपने पैरों पर झुकने से पहले ही आरती के हाथों को अपने हाथों में थाम लिया था और प्यार से बोला" तुम मेरे जीवन को बचाने वाली मेरी जीवनसंगिनी हो तुम्हारा स्थान मेरे चरणों में नहीं मेरे दिल में है।" यह सुनते ही आरती खुशी से पति के सीने से लग गई थी दोनों पति-पत्नी का ऐसा मिलन देख कर उस की बुआ सास और सास-ससुर ने उनके ऊपर फूलों की वर्षा कर दी थी।
हमारे समाज में शादी विवाह के अवसर पर बहुत से लोग जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते हैं जिसके कारण कई बार बुरे हादसे हो जाते हैं इन हादसों के कारण कई बार लोगों की मौत भी हो जाती है। भाग्यवान होते हैं वे लोग जो हादसे में जीवित बच जाते हैं ऐसे में नई बहू को दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराकर उसे अपशकुनी कहना उचित नहीं बहु तो अन्नपूर्णा और लक्ष्मी का रुप होती है। ऐसे लोगों को सजा मिलनी चाहिए जो शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं क्योंकि ऐसे लोगों के कारण ही कई बार अनेक बेकसूर लोगों का जीवन संकट में पड़ जाता है।
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