अदिती का मोबाइल रात के देढ बजे बज उठा। वह घबराकर उठ गई। इतनी रात गये किसका फोन होगा... मन ही मन वह भयभीत हो गयी। उसने हाथ बढ़ाकर टेबल से मोबाइल उठाया. स्क्रीन पर अनन्या का नाम दिखा... उसने झटसे फोन कान से लगाया।
हॅलो...माँ... मैं चावल बना रही हूँ तो बताओ, कूकर में कितना पानी और बर्तन में कितना पानी डालू?
आँखे निंद से बोझिल बंद होने के लिये बेताब हुए जा रही थी और कानों में कुकर, चावल,पानी शब्द पड रहे थे.... एक पल के लिए उसे समझ ही नहीं आया कि क्या कुकर.. क्या पानी...
माँ...बताओ ना.. अनन्या फोन पे तीन बार पूछ चुकी थी.
अब जाके उसकी ट्यूबलाइट जली...
अरे बेटा,एक गिलास पानी कुकर में डाल और हाथ की दो उँगलियाँ डूबे इतना पानी चावल वाले बर्तन में डाल...
और माॅं कितनी सिटी मारू..?
तु क्यूँ सिटी मारती है...कुकर को मारने दे तीन सिटी...
क्या माँ मुझे इतना तो समझता है.. अनन्या का नाराजी वाला स्वर सुनाई दिया.
अरे... मै तो मजाक कर रही हूँ ..तीन सिटी होने दे.
माँ, अभी आलू बैंगन की सब्जी भी बनाना है...तो..
फिर अदिति ने उसे बताया कि आलू बैंगन की सब्जी कैसे बनाना. आधे घंटे में मैसेज आया बन गया खाना.
अदिति ने अपनी घड़ी की ओर देखा, तीन बज रहे थे. उसने फिर आँखें बंद कर ली।
अगले दिन वह सुबह देर से उठी। साढ़े आठ बज रहे थे। उसने मोबाइल की तरफ देखा अनन्या ने खाने की प्लेट का एक खूबसूरत फोटो भेजा था। साथ में मेसेज भी था ' माॅं,खाना बढिया बना. सात दिन बर्गर, पिझा खाने के बाद आज पहली बार चावल और सब्जी खाई. आपके जितनी अच्छी तो नहीं बनी पर बर्गर,पिज्जा से कई गुना अच्छी थी.. लव यु माॅं.
उसने जवाब में लिखा.. लव यु टू बेटा.
उसने मन ही मन कहा, अदिती तेरी अगली कुछ रातें ऐसी ही खाना बनाना सिखाने में ही कटने वाली है... सोचकर वह मुस्कुरा उठी और फ्रेश होने बाथरुम में चली गयी।
बाहर आकर अपूर्वा को आवाज दी, अपूर्वा, नौ बज गये उठो।
हाँ, माँ उठती हूँ, उसने अलसाये स्वर में कहा।
पायल ने चाय का कप अदिती के सामने रखा.
अपूर्वा ने पायल से अपुर्वा के लिए आलू की सब्जी और पराठे बनाने को कहा और चाय पीने लगी।
अनन्या दस दिन पहले ही अमेरिका पढ़ने गई थी। शुरू के सात आठ दिन बर्गर ,पिज्जा खाया फिर अपनी रसोई का सामान इकठ्ठा किया और कल जाकर पहली बार खाना बनाया।
इससे पहले उसने कभी खाना नहीं बनाया था... अमरिका जाने से पहले भागमभाग में थोडा बहुत सिखा था बस... इसलिए कल रात उसने फोन किया. चुंकी वहाँ रात और यहाँ दिन होता है इसलिये अब कुछ दिन अपनी निंद का गुडगोबर होने वाला है सोचकर ही उसे हँसी आयी.
उसे अपनी माँ की बातें याद आ गईं। समय आने पर लड़कियाँ सब सीख जाती हैं इसलिये अभी से उनके पीछे क्यों काम का झ॔झट लगाना, आराम से पढाई करने दो... फिर तो जिंदगी भर उन्हें काम करने ही होंते है.
मेरी मां ने हमें भी कभी खाना,कपडे,बर्तन के काम में नही उलझाया। हमेशा हमें पढाई पर ध्यान देने को कहा. आज मैं जो कॉलेज में पढ़ाती हूं वह मेरी मां की बदौलत ही संभव हो सका.
शादी से पहले मुझे खाना बनाना आता था लेकिन खास कुछ नहीं. शादी के बाद ससुराल ज्यादा दिन नहीं रह पाये क्योंकि ससुराल गांव में था और हमारी नौकरी शहर में थी. इसलिए वहाॅं भी कुछ सिखने नहीं मिला.
शहर में आने पर मुझे खाना बनाना ही पडा. कभी चावल कच्चे रहते तो कभी जल जाते। कभी सब्जियों में पानी नहीं होता तो कभी पानी में सब्जियाॅं ढूंढ़नी पडती इतना पानी डलता.अश्विन मेरे पती मुझे चिढ़ाकर कहते की अगर मैंने हॉस्टल में खाना बनाना सीखा नहीं होता तो आज भुखे रहने की नौबत आती.
अनन्या की तरह मैं भी शादी के बाद रोज फोन करके मां से पूछती थी ये कैसे बनाऊ वो कैसे बनाऊ... माँ भी मुझे बिना चिडचिड किये एक ही चीज बार बार बताती थीं.आज भी कुछ खास बनाने के लिए मां को फोन करना ही पड़ता है.
हमारी माँ बहुत ही सुलझे विचारों वाली है. हमने उसे कभी इस बात का दुख मनाते नहीं देखा की उन्हें दो लड़कियाँ ही हैं.
काश, मुझे एक लडका होता, ऐसा वाक्य उसने कभी भी नहीं बोला.हमारे कई रिश्तेदार आते जाते माँ के पीछे दादी के कान भरते की वंश चलाने एक लड़का होना चाहिए... लेकिन माँ के सामने बोलने की किसी की भी हिम्मत न होती.क्योंकि वो पूरे परिवार की रीढ़ की हड्डी थी. नन॔द और दो देवर की शिक्षा और विवाह में उसने कोई कसर नही छोड़ी थी.
घरवालों के लिये इतना करने के बाद भी उसने कभी बडप्पन नही जताया. मगर उसने अपना मजबूत वजूद बनाया था. जब मुझे दूसरी बार भी बेटी हुयी तब मेरी सास परेशान हो गईं और उन्होंने कहा कि इस बार तो बेटा होना चाहिए था. इसपर मेरी माँ बोली,
दीदी, हमारी माँ ने भी हमारे जन्म के समय यदि यही बात कही होती तो आज हम जिंदा न होते?
इतना सुनते ही सासु माँ ने अपूर्वा को गले लगाया था. उस वक़्त उनकी आंखों में मैने नमी देखी थी.
चाय खत्म हो चुकी थी. मैने फोन लगाया
हैलो, माँ आज मैं ना भरवाँ करेले बनाना चाहती हूँ... जरा बताना कैसे बनाते है?
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