दिसम्बर की सरदी में छत पर बैठ कर धूप तापने का मज़ा ही कुछ और है... आह! हा! आह! हाथ में चाय का कप लिए वो खाट पर बैठी हुई धूप का और चाय का दोनों का मज़ा उठा रही थी. चाय खत्म कर जैसे ही कमर सीधी करने को लेटी, तभी फोन भनभनाया.. एक watsapp message था. नंदिनी ने फोन की तरफ झांका तो screen पर लिखा था.. डमडमिया (यानि उसकी जेठानी) का मैसेज था और जब नंदिनी ने मैसेज बाक्स खोला तो पूरा मैसेज यह था कि, "और भई सुपरफास्ट (यानि मैं, नंदिनी) होली पर आ रही हो या नहीं. मन किया कि लिख दूँ, "तुम बुला रही हो या पूछ रही हो?.." फिर दिल ने कहा, "छोड़ यार, खाली खनकने दे डमडमिया को, कुछ रिप्लाई कर दिया तो.. डमडमिया फट जाएगी, इस लिए वह फोन एक तरफ रख कर आंखे मूंद कर लेट गई और बीते वक्त के कुछ किस्से और हसीन लम्हों से मिलने लगी.
"तेरी गली से गुजरे जमाना हुआ..
अब तो . ...मेरा वक्त भी पुराना हुआ."
10 साल पहले जब मैं (नंदिनी) नई नई आई थी सुसराल में, तो कैसे सब मुझसे टहल टहल के बातें पूछते थे मेरे घर के बारे में, और मैं कैसे नादान स्वर मे तपाक से जबाब दे देती थी. जब जेठानी जी ने पूछा कि कितनी तरह की पनीर सब्जी बनानी आती है, तो मैंने कह दिया था कि मेरे घर में तो स्पेशल सब्जी तो मेरे पापा ही बनाते हैं फिर चाहे वो पनीर हो या दाल मक्खनी.... और तो सिर्फ गरम गरम खाने का मज़ा लेते थे. पर मुझे तो सिम्पल सब्जी ही बनानी आती है. तो कैसे सब हंस दिए थे तब मेरे मुंह से निकल गया था कि क्यों आपके यहाँ कोई भी मर्द कुकिंग नहीं करता क्या? बस, यह बात सुनकर बुआ सास बोली थी... छोटी भाभी,.. तुम्हारी बहु बड़ी होशियार है.. मुझे यह सुनकर बहुत बुरा लगा था पर मैं तब कुछ ज्यादा बोल नही पाई. कुछ दिन बाद ससुर जी ने घर में सभी को खाने पर आमंत्रित किया.. हम भी डमडमिया और सासु जी के साथ रसोई में ही तैयारी कर रहे थे तभी सासु जी बोली.. नंदिनी फ्रिज में से धनिया लाकर सब्जी में डाल दो.. हम भी धनिया लाकर उसे काटने के लिए चाकू देखने लगे लेकिन एक चाकू से जेठानी जी गोभी काट रही थी और दूसरे से चाची सासु जी सलाद, तो लिहाजा मैंने रसोई वाली कैंची (जो मिर्ची और पैकेट काटने के लिए रखी होती है) से धनिया काट दिया था कि तभी "चाची जी" बोली, "ले चाकू, किससे काट रही है धनिया,..?" मैंने हाथ पोछते हुए बोला था, "चाची जी अब तो काट दिया,.... और चाची जी बोली," बड़ी तेज चलाती हो हाथ... सुपरफास्ट हो… मैंने भी हंसकर कह दिया था, "जी, बस यही नामकरण हो गया मेरा........ अब जेठानी जी डमडमिया कैसे बनी वो सुनो.....
एक बार सुबह नाश्ते में घर के सभी सदस्यों को, आलू, गोभी और प्याज के पराठे खाने थे सासु जी ने पडोस से देवर जी के दो दोस्तों को भी बुला लिया था, अभी जेठानी जी रसोई में आटा लगा रही थी और मै आलू चटनी बना रही थी कि तभी आडर हुआ कि टमाटर और धनिया चटनी भी बनानी है, समय कम, हम दो और खाने वाले ज्यादा... तो मैंने फटाफट जो दो बडे़ बडे़ गोभी के फूल थे उन्हें धो के और काट कर मिक्सी में एक pulse देकर घुमा दिया.. गोभी का दरदरा चूरन तैयार...और प्याज़ भी मिक्सी में डाल कर pulse दे दिया था और फिर प्याज़ को निचोड़ दिया था... यह देख कर जेठानी जी तब बोली, "वाह सुपरफास्ट.. बेहतर काम किया.... और फिर हमने सबको टाइम से नाश्ता करा दिया... अब यह बात मुझे जब 6 महिने बाद मौसी सासु से सुनने मिली कि.. मैं तो आलस के मारे गोभी और प्याज़ मिक्सी में पिसती हूँ तब मुझे यह सुनकर धक्का लगा.. और पता चला कि जेठानी जी ने सब जगह यह बात फैलाई है... तब से इनका नाम मैंने डमडमिया रख दिया और मजे वाली बात तो देवर जी की शादी में हुई थी. जब सभी लोग बैठकर अंताक्षरी खेल रहे थे, एक दूसरे की टांग खींच रहे थे.. एक दूसरे को चिढ़ाते हुए गाने गा रहे थे तो मैंने भी एकाएक एक गाना गुनगुना दिया था....
"सासु जी तुने मेरी कदर ना जानी......(सब सासु की तरफ़ इशारा)
बहु को तूने बहु न समझा.....
समझा,.. समझा..... नौकरानी
कि तभी बुआ सास को यह गाना बुरा लगा था और बोली थी, "बड़ी सुपरफास्ट हो.. बहु, जबान से भी और हाथ से भी.... फिर मैंने भी कहा था, "जी बुआ जी, और दिमाग से भी.....
बुआ जी बोली, "एक जबाब उधार नहीं देती हो, कैंची की तरह कतरनी चलती है, अब जब मैं वहाँ से उठकर जाने लगी तो भैया ने बोला था, "क्यो भाभी, गुस्सा हो कर जा रही हो.?
तब मैंने कहा था हंस कर, "नहीं, जरा पर्स लेने जा रही हूँ, अपना, क्योंकि जबाब तो उधार नहीं दे सकती, तो सोचा पैसे ही दे दूं, और फिर सब हंस दिए, कुछ बनावटी हंसी और कुछ असली...बुआ जी को छोड़ कर.. और फिर मैं अपना एक कान पकड़ कर sorry bua ji कह कर वहाँ से चली आई थी.
"हम भी निश्चल ही आए थे..
हम भी कोरे ही आए थे..
तुमने ही हमको पापी बनाया..
तुमने ही हमको सहना और बोलना सिखाया…
Comments
Post a Comment