प्रिय दीदी,
आप उम्र में मुझसे छोटी है इसलिए प्रिय कह रही हूँ, बड़ी होती तो आदरणीया लिखती। दीदी तो मुझे हर हाल में लिखना ही है। हाँ, देवर उम्र में छोटा हो या बड़ा भाभी के चरण स्पर्श करता है मगर ननद के साथ पूर्वजों ने ऐसा विधान नहीं बनाया है। यह विधान उल्टा है। ननद बड़ी हो या छोटी भाभी को ही उसके चरण स्पर्श करने होते हैं।
आजकल की हम जैसी लड़कियों से हमसे पहले वाली पीढ़ी को यह भी शिकायत है कि हम रिश्तों की मर्यादा भूल गई हैं। आजकल हम उम्र में छोटी ननद और देवर को दीदी और भैया न कहकर नाम से पुकारने लगी हैं। जहाँ अरेंज मैरिज हो वहाँ तो जैसा सिखाओ वैसा हम सीख जाती हैं मगर बात लव मैरीज की हो तो यह थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए क्योंकि हमारी ननद और देवर हमें दीदी से भाभी बनाते हैं, वो शायद उनके लिए आसान होता है मगर हम उन्हें हमारे दोस्त के छोटे भाई और बहन, जिसे की आज तक तुम कहकर नाम से पुकारते थे से सीधे दीदी और भैया तक नहीं ला सकते, यह हमारे लिए बहुत मुश्किल होता है फिर भी हमें यह करना ही पड़ता है।
आपको लग रहा होगा कि भला यह भी कोई विषय है जिसे खत के माध्यम से उठाया जाए मगर विषय तो है ही न। यहीं से तो दूरियाँ शुरु होती है। तुम से आप का सफर बहुत लम्बा होता है। खैर, एक पराये घर से दूसरे पराये घर के सफर में आप एक अहम् कड़ी है। आपको लगता है कि मैं आपके घर में आपका ओहदा, आपका सामान, आपका कमरा आदि सब पर कब्जा करने एक अनाधिकृत प्राणी बनकर आ गई हूँ मगर सच तो यह है कि मैं अभी तक यह नहीं समझ पाई हूँ कि क्या सच में यह मेरा घर है।
हाँ, यह सच है कि यहाँ मेरे नाम से एक कमरा है, मेरे पास जेवरात है, नए कपड़े हैं मगर क्या वे अधिकार है जो घर के बाकी सभी प्राणियों को हो, माफ किजियेगा दीदी, जो आपको है।
यहाँ आकर मेरा नाम निशा से बदलकर रोशनी कर दिया गया है क्योंकि आपके दादाजी अर्थात मेरे दादा ससुर को लगता है कि अंधकार रूपी रात का नाम वे दिन में कई बार कैसे ले सकते हैं। मेरे दादाजी होते तो मैं उन्हें उनकी इस बात पर लम्बा चौड़ा लेक्चर देकर यह समझा सकती थी कि रोशनी का वजूद ही इसलिए है क्योंकि अंधेरा है। मगर वे आपके दादजी है इसलिए मैं उनसे बहस नहीं कर सकती, अगर गलती से कर ली तो वह उनकी बेइज्जती कहलायेगी।
शादी की थकान के कारण आपके प्यारे भाईसाहब, आप और घर के बाकी सभी प्राणी सुबह देर से उठ सकते हैं, मैं नहीं, क्यों, क्योंकि मैं घर की बहू हूँ, वह भी नई नवेली। अरे भई, बहू को तो बहू की तरह रहना ही पड़ेगा। चलिए यह सब छोड़िये, नई भाभी की अटैची ननद खोलती है, आपने भी खोली, और मेरी वह साड़ी अपने लिए पसंद कर ली जो आपको बहुत पसंद आई। यह रस्म है, इसमें आपकी कोई गलती नहीं हैं मगर इसमें मेरी भी क्या गलती है कि मुझे भी वही साड़ी सबसे अधिक पसंद आई थी। मैंने बड़े अरमान के साथ अपनी पहली खास रात में उसे पहनने की योजना बनाई थी मगर उससे पहले ही वह आपकी उस अलमारी में चली गई जो आपको अब अपनी मम्मी के साथ शेयर करनी पड़ रही है और मेरी वह अलमारी उसके लिए तरसती रह गई जो कभी आपकी थी मगर अब पूरी तरह से मेरी है।
“क्या भाभी आप भी कितनी छोटी-छोटी बातों को लेकर बैठ रही है, यह भी क्या पत्र में लिखने की बातें है।” दीदी, आप ऐसा ही सोच रही होंगी मगर मैं क्या करूँ मुझे तो छोटी-छोटी वस्तुओं और छोटी-छोटी गलतियों की ही अधिक फिक्र होती है क्योंकि उन्हें ही तो ससुराल में बड़ा बनाकर दिखाया जाता है।
आज सुबह ही तो मैंने चाय में थोड़ी शक्कर कम डाली थी क्योंकि मेरे घर में अर्थात मेरे मायके में सब कम शक्कर की चाय पीते हैं तो आपकी मम्मी ने मुझे तुरंत कह दिया,
“बहू, हमारे यहाँ शक्कर इतनी महंगी नहीं है कि हम खाने में कंजूसी करें।”
यहाँ मैंने आपकी मम्मी इसलिए कहा है कि यदि आपके हाथों ऐसा हुआ होता तो उनका वाक्य इस तरह से फ्रेम नहीं हुआ होता। उनका इस घर के लिए हमारे यहाँ कहना और मेरे मायके के लिए तुम्हारे यहाँ कहना मुझे बहुत बड़ी दुविधा में डाल देता है कि आखिरकार इस हमारे और तुम्हारे में मेरा कहाँ पर है।
खैर छोड़िये यह सब, मैं भी नौकरीपेशा हूँ और आप भी है। शादी के एक महीने बाद मैंने और आपने दोनों ने अपना-अपना काम आरम्भ कर दिया है। जिस दिन घर पहुँचने में थोड़ी देर हो जाए तो आप थकीहारी लौटकर आती है और मैं डरी हुई, शायद इसलिए क्योंकि मैं बहू हूँ और आप बेटी।
बस एक ही सवाल है, जब तक आपकी शादी नहीं हो जाती, और जब से मैं इस घर में आई हूँ तब से, यह घर हम दोनों का बराबर ही है फिर मेरे लिए और आपके लिए अलग-अलग मापदंड क्यों है। अगर इस क्यों का जवाब मिल जाए तो शायद ननद-भाभी और सास-बहू में होने वाले सभी मतभेदों और मनभेदों का कारण भी मिल जायेगा।
आपको तो चिट्ठी लिख दी है। मेरी प्यारी सासू माँ भी शायद मुझसे बहुत कुछ कहना चाहती है। तो मुझे कल इंतजार रहेगा कि वह मेरे लिए अपने खजाने के कौनसे मोती निकालकर लाती है। तब तक के लिए अलविदा मगर मुझे बताइयेगा जरुर कि आपको मेरी चिट्टी कैसी लगी।
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