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सासू मां जब देखो बड़बड़ करती रहती हो

 गलती इंसान के जीवन का एक हिस्सा है जब तक इंसान गलती नहीं करता तब तक वह कुछ सीखता ही नहीं इसलिए मैंने तुमसे कहना ही छोड़ दिया" देविका ने अपनी बहू  रोमा से कहा तो वह बोली "यह तो बात ठीक है मम्मीजी परंतु, आपने मुझसे बोलना क्यों छोड़ दिया? जब आप  बोलती थी तो मैं गलती करने से बच जाती थी परंतु, आज आपके ना होने ने से कितना बड़ा नुकसान हुआ मेरी सारी सब्जी जल गई अब मुझे दोबारा से खाना बनाना पड़ेगा कितने मन से  मैंने यह दोंनो सब्जी बनाई थी।

              यह सुनकर देविका बोली "तुम्ही तो कहती थी मुझसे कि  सासू मां तुम तो दिन भर बड़बड़ करती रहती हो कभी तो चुप बैठ जाया करो यह सुनकर  मैंने तुमसे कहना बंद कर दिया अब अपनी करनी आप भुगतो। "

         "वो तो ठीक है मम्मी जी मैं दोबारा खाना बना दूंगी परंतु आज के बाद दुबारा ऐसी गलती  नहीं करूंगी लेकिन आप वादा करो मुझसे बातें करती रहेंगी मैं माफी मांगती हूं आपसे दोबारा आपसे ऐसी बातें नहीं कहूंगी जिससे आपका दिल दुखे प्लीज माफ कर दो मुझे "रोमा ने पश्चाताप भरे स्वर में कहा तो देविका ने उसे माफ करके गले से लगा लिया था।

               तब रोमा मुस्कुराते हुए बोली" मम्मी जी आप ड्राइंग रूम में बैठकर टीवी देखिए मैं अभी थोड़ी देर में आपके लिए खाना बना कर लाती हूं" यह कहकर वह खाना बनाने रसोई में चली गई थी। देविका टीवी देखते हुए रोमा के बारे में सोचने लगी थी 4 महीने पहले ही उन्होंने धूमधाम से अपने बेटे रोहित का विवाह रोमा के साथ किया था रोमा बेहद खूबसूरत और पढ़ी-लिखी लड़की थी वैसे तो वह घर के हर कार्य में निपुण थीं परंतु, उसमें एक ही कमी थी जब भी वह कोई काम करती काम को पूरा करने की बजाय उसे अधूरा छोड़ कर फोन चलाने लग जाती थी कभी अपनी सहेलियों से बातें करती तो कभी अपनी मम्मी से बातें करने लग जाती थी इस चक्कर में कभी-कभी अर्थ का अनर्थ हो जाता था।

               1 दिन की बात है रोमा रसोई में दूध गर्म कर रही थी इसी दौरान उसकी सहेली का फोन आ गया सहेली से बात करने में वह इतनी मशगुल हो गई थी कि उसे दूध का ध्यान भी ना रहा था  जब उसकी  सास ने  उसका दूध की तरफ ध्यान दिलाया और उसे प्यार से समझाया कि "काम करते वक्त ज्यादा बातें मत किया करो सिर्फ जरूरी बातें करके पहले काम पूरा करके फिर आराम से बातें कर लिया करो" तब उसने भागकर गैस बंद की। एक बार वह अपने कपड़ों पर प्रेस कर रही थी कि उसकी मम्मी का फोन आ गया वह फोन पर बातें करने में इतना बिजी हो गई थी की उसे प्रेस का ध्यान ना रहा  उसके कपड़े में  बदबू आने लगी थी।

    जब देविका ने उससे अपने कपड़े देखने के लिए कहा तो वह गुस्से में बोली" सासू मां जब देखो बड़बड़ करती रहती हो कुछ देर चुप नहीं रह सकती हमेशा मुझे कुछ ना कुछ बोलती रहती हो देख नही  रही कि मैं अपनी मम्मी से बात कर रही हूं।" यह सुनकर देविका बेहद दुखी हो गई थी उसके बाद उन्होंने रोमा से बोलना छोड़ दिया था यदि वे कुछ  कुछ गड़बड़ी होते देखती तो खुद ही ठीक कर देती थी।

       1 दिन सुबह के समय रोमा ने बड़े मन करके मटर पनीर की सब्जी और  बैंगन का भर्ता बना रही थी क्योंकि उसे यह दोनों सब्जी बेहद पसंद थी सब्जी बनाने के दौरान उसके फोन में किसी सहेली का मैसेज आ गया मैसेज पढ़ने के दौरान वह अपनी  अन्य सहेलियों के मैसेज पढ़ने लगी मैसेज पढ़ते-पढ़ते उसे इतनी देर हो गई कि गैस पर रखी दोनों सब्जी पूरी तरह से जल गई थी और दिन तो उसकी सास गैस बंद कर देती थी परंतु, आज उसकी सास भी किसी काम से घर से बाहर गई हुई थी जली हुई सब्जियां देखकर रोमा को बहुत दुख हुआ था इसी दौरान उसकी सास भी घर पर आ गई थी वे जली हुई सब्जियां देखकर रोमा से कुछ नहीं बोली चुपचाप अंदर चली गई थी।

           तब रोमा को अपनी गलती का एहसास हुआ वह मन ही मन सोचने लगी कि उसकी सास  ठीक ही कहती थी यदि  वह अपनी सास  की बात पर ध्यान देती तो उसकी सब्जी ना जलती बस एक मैसेज का जवाब दे देती और मैसेज तो वह बाद में भी पढ़ सकती थी उसने अपनी सास  से अपनी गलती के लिए माफी मांगी। देविका रोमा के बारे में सोच ही रही थी कि तभी रोमा उनके लिए दुबारा खाना बना कर ले आई और हंसते हुए बोले "मम्मी जी जल्दी से खाना खा लो अबकी बार मैंने खाना जलाया नहीं बड़े ध्यान से बनाया है यह सुनकर देविका हंसने लगी थी।

          दोस्तों यदि हम सोच समझकर मोबाइल का इस्तेमाल करें तो मोबाइल हमारे लिए बेहद फायदेमंद है इससे हमें बहुत सारी चीजें सीखने को मिलती हैं परंतु, बहुत से लोग मोबाइल में इतना खो जाते हैं कि अपना ही नुकसान कर बैठते हैं कभी-कभी तो मोबाइल के चक्कर में कुछ लोग अपनी जान भी गंवा देते हैं इसलिए मोबाइल का इस्तेमाल भी सोच समझकर ही करना चाहिए।


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