पता है भाभी,
जब किसी रिश्तेदार या पड़ोसी के यहाँ शादी में जाना होता तो कुछ ख्याल मन के दरवाजे पर आम तौर पर अठखेलियाँ करते थे-
“मेरे भाई की शादी होगी तब मैं सरला जैसे फटीचर कपड़े नहीं पहनूँगी, मैं तो कुछ ऐसा पहनूँगी कि लगे कि मेरे भाई की शादी है।”
“वह सब छोड़ो, गुप्ता अंकल ने जैसी घटिया खाने की व्यवस्था की वैसी तो मैं बिल्कुल नहीं होने दूँगी। मैं तो पापा से बोलकर ऐसा कुछ मेन्यू बनवाऊँगी कि लोग ऊँगलियाँ चाटते रह जाए।”
“ऐसा डेकोरेशन करवाया है शर्मा जी ने, यह तो बाबा आदम के जमाने में होता था, मैं तो खुद अपने हाथ से लेटेस्ट फेशन का डेकोरेशन करवाऊँगी, जिस दिन सगाई होगी उसी दिन से पूरा इंटरनेट खंगाल दूँगी।”
“यह भी कोई डांस है भला, दुल्हे के मम्मी-पापा अर्थात जैन अंकल-आंटी को देखो तो, बिना तैयारी के स्टेज पर आ गए और खुद का मजाक बनवा रहे हैं। मैं तो महीने भर पहले से ही कोरियोग्राफर रख लूँगी। हाँ, हाँ पता है वह तो थोड़ी देर ही आयेगा, प्रेक्टिस तो मेरे को ही करवानी होगी, हाँ तो करवा लूँगी, कौनसी बड़ी बात है, आखिर इतने वर्षों के इंतजार के बाद मेरे भाई की शादी होगी।”
और भी न जाने क्या-क्या दिमाग में उमड़ता-घुमड़ता रहता था पर जिस दिन यह खास दिन आया अर्थात आपकी भैया से सगाई हुई तो लगा अरे यह दिन तो बहुत जल्दी आ गया। दिल बहुत खुश था, आखिर घऱ में शादी जो होने वाली थी।
प्रतिदिन होने वाली मीटिंगस् से धीरे-धीरे एक बात समझ में आने लगी कि मम्मी-पापा को आने वाली बहू के चाव से अधिक वर्षों से चले आ रही बचत को आपात स्थिति के लिए बचाकर रखने की चिंता है। इस बात की भी चिंता है कि कुछ दिन बाद उन्हें मेरी भी शादी करनी है। मैं सुनकर कभी खुश होती कभी दुःखी, खुशी इस बात की कि वे मेरे बारे में सोच रहे थे, दुख इस बात का कि अपनी पसंद के महंगे कपड़े शायद न खरीद पाऊँ।
मारवाड़ी में कहावत है, चेजो चिनार देख ल्यो और ब्याव मांडर देख ल्यो।
अर्थात- घर बनाने का काम शुरु कर लो या शादी की तारीख निकाल लो, उसके बाद जो खर्चे होते हैं वो पहले से बनाये बजट में समा ही नहीं पाते।
हमारे घर में भी यही हो रहा था। पानी की तरह पैसा बह रहा था मगर फिर भी लग रहा था कि मैं अपने मन का तो कर ही नहीं पा रही। अचानक से मन में दबे पाँव एक छोटी सी ईर्ष्या ने स्थान बनाना आरम्भ कर दिया था। मेरा कमरा, मेरी अलमारी, मेरी टेबल सब कुछ, भाभी के घर में न आने से पहले ही भाभी के नाम पर स्थानांनतरित हो गई थी। उसके लिए तो शायद मैं भी तैयार थी मगर यह उससे कुछ और था क्योंकि ये सब कुछ या तो नए से बदल दिये गए थे या पुरानों को कुछ ऐसे सजा दिया गया था कि वे नए लगे या न लगे मगर कम से कम पुराने तो नहीं लगे।
तब जाकर अब समझ में आया था कि हाँ भई, घर में भाभी आ रही है। भाभी आने के मायने केवल मौज-मस्ती नहीं होती, घर में एक जीता जागता प्राणी आता है जो या तो आपका हमउम्र है या उम्र में आपसे कुछ साल छोटा या ब़ड़ा है। अब यह घर उसका है, आप तो इस घर में पराई ही है, वास्तविक घर तो यह उसी का ही है।
इसके साथ ही एक नया डॉयलॉग और अब हवा में तैरने लगा था,
“मुन्नी की शादी में देखा जायेगा, अभी तो मुन्ने की शादी हो रही है उसे तो अच्छी तरह कर लिया जाए, आखिरकार नाक की बात है।”
मैं यह सुनकर खुश थी या दुःखी, स्वयं का विश्लेषण करके भी नहीं जान पाई थी। शादी की जितनी तैयारियाँ वर्षों से दिमाग के स्तर पर हुई थी उसकी मात्र आधी ही कागज पर हो पाई थी। और जितनी कागज पर हुई थी उसकी मात्र आधी ही हकीकत के धरातल पर हो पाई थी। अब मुझे सच में लग रहा था कि इस शादी में और सरला, गुप्ता अंकल, शर्माजी, जैन अंकल-आंटी आदि के यहाँ हुई शादियों में कोई खास फर्क नहीं था।
अब आप घर में आ गई थी। उन सभी सपनों को पोटली सिर पर ऱखकर जो मैंने भी अपने ससुराल के लिए देखे हैं। फर्क बस इतना ही था कि मैं यह भूल गई थी या चाहकर भी याद नहीं रखना चाहती थी। सोने की चैन भी यदि कभी मम्मी से जिद करके ले लेती थी तो मम्मी रात सोने से पहले गले से निकलवा ही लेती थी, यहाँ तो भाभी को वह सारे जेवरात दे दिये गए थे जिन्हें मम्मी ने खुद भी कभी अधिकार और गर्व से नहीं पहना था।
मुँह दिखाई के नाम पर रिश्तेदार ऐसे पैसे और सामान लुटा रहे थे जैसे आपसे बड़ा कोई सेलेब्रेटी इस दुनिया में पैदा ही नहीं हुआ हो। मुझे आपसे जलन नहीं थी कतई नहीं थी, यार मैंने तो आपकी शादी का वर्षों इंतजार किया था मगर शायद तब मुझे पता नहीं था कि भाई की शादी के मायने एक अनजान लड़की का घर में आकर उस घर को सरल भाषा में कहूँ तो हथिया लेना होता है।
बस यहीं से तो ननद-भाभी का रिश्ता तीखा-मीठा होता है जिसे समझने में भाभी को वर्षों लग जाते हैं। मेरी प्यारी भाभी, मैं उम्मीद करती हूँ कि आप आपके साथ मेरे व्यवहार का कारण समझेंगी और मुझे समझने की पूरी कोशिश करेंगी कि मैं अपना भाई, अपना परिवार अपना सामान सब कुछ आपके साथ बाँटने वाली हूँ तो मुझे थोड़ा समय चाहिए।
तो दोस्तों, यह था ननद का हाले दिल बयान, अब चलिए कल बात करेंगे कि एक प्यारी भाभी अपनी नई ननद के नाम क्या लिखती है।
नोकझोंक और शिकायतों से भरा ननद का भाभी के नाम खत आपको कैसा लगा, यह जानने कि लिए आपके कमेंटस् का मुझे सदैव की तरह ही इंतजार रहेगा।
आपकी
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