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आश्वासन

 मुंबई शहर जो कभी सोता नहीं..... भागता दौड़ता शहर, बड़ी बड़ी कंपनियां भारी भरकम पैकेज.... अपार पैसा पर खर्च करने को भी समय नहीं..... ऐसे ही व्यस्त जीवन जीते रवि और काव्या.... प्रेम विवाह किया ,दोनों ही आई टी सेक्टर में बड़े ओहदों पर... गगनचुंबी इमारत पर चार बैडरूम हॉल का सर्वसुविधायुक्त 

फ्लैट.... दोनों की मासिक आय करोड़ से कहीं ज्यादा... पदोन्नति और कामयाबी में सिर से पैर तक डूबे हुए.... परिवार के बार बार दखल देने के बाद गुड़िया की तरह एक संतान हुई.... छह माह होते ही नौकरी पर जाना शुरू!!

रवि की मां नहीं पिता बड़े बेटे के पास रहते वहीं की जिंदगी के अभ्यस्त, काव्या की मां पैरों की तकलीफ से असमर्थ.... किसी नामी संस्था से 50.000 मासिक पर नैनी रखी गई, एक कमरा उसे रहने को भी दे दिया गया!!

छोटी सी मान्या नैनी को ही मां की गोद समझ पलती रही.... मां की गोद में जाने को मचलती तो थोड़ा सा दुलारकर वापस नैनी की गोद में डाल दिया जाता आखिर सुबह की मीटिंग में प्रेजेंटेशन की तैयारी भी करना होती थी!!

इतवार को दोनों देर तक सोते, उठते स्पा, पार्लर बुक रहते, आधा दिन निकल जाता रात को दोनों डिनर पर निकल जाते.... नन्हीं मान्या टुकुर टुकुर अपने पालकों को देखती रहती... टाटा बाय करना सिखा दिया था, यंत्रवत हाथ हिला देती!!

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मान्या ढाई साल की हो गई, प्रतिष्ठित प्ले स्कूल में एडमिशन करा दिया गया... अब उसे समझ में आने लगी,मम्मी पापा की व्यस्तता... जिद भी करने लगीं साथ जाने की, डांट पड़ने लगी कभी कभार चांटा भी पड़ जाता.... नौकरी का बोझ माता पिता के जीवन को बोझिल करने लगा , आए दिन की तकरार, पेरेंट्स डे पर एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपना ,दोषारोपण करना रोज़ का किस्सा हो गया.. नतीजा एक दिन दोनों कोर्ट में आमने सामने खड़े तलाक़ की मांग कर रहे हैं!!

बच्चे की कस्टडी को लेकर जज ने सवाल पूछा दोनों ही तैयार.... बच्ची से जब पूछा गया " बेटा किसके साथ रहना चाहोगी, मम्मी या पापा के साथ" बच्ची टुकुर टुकुर दोनों को देखती रही दोबारा पूछने पर नैनी की ममता भरी आंखों में झांका और जोर से गले से लिपट गई बोली " नैनी मां के साथ" बूढ़ी नैनी की आंखों से आंसू बह गए, जोर से चिपका लिया बच्ची को यह देख रवि और काव्या मूर्ति से खड़े रह गए... कहां गया वो हमारे बीच का प्यार, शादी हमारी बच्ची जिसे आज हम खोने जा रहे हैं, हमसे ज्यादा उसे अपनी आया से प्यार? इतना हासिल करने के बाद हमारे पास बचा क्या?

पश्चाताप आंसुओं के रास्ते बह निकला, दोनों ने आंखों ही आंखों में एक दूसरे से छमा मांगी, वादा किया बिगड़ी को बनाने का, आश्वासन दिया..सब ठीक करेंगे.... कदम बढ़ाए अपनी बेटी की ओर... मासूम सूनी आंखों से दोनों को देखती रही फिर खिलखिलाकर दोनों की फैली हुईं बाहों में समा गई!!

कोर्ट में उपस्थित सभी की आंखों में खुशी की नमी थी, जोरदार तालियों से उनके निर्णय का स्वागत किया!!

 सपने देखें पर अपनों के बिना नहीं.... आख़िर हम मेहनत अपनों के लिए ही तो करते हैं न!!

प्रीति सक्सेना


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