रजनी बिस्तर पर लेटी हुई थी, एक तो ठंड बढ़ती जा रही थी ऊपर से बुखार ने उसका पूरा शरीर तोड़ दिया था| रजनी का पति रवि ऑफिस जा चुका था| तभी रजनी की सास सुजाता जी उसके कमरे में आई|
"बहू, चलो थोड़ी देर बाहर धूप में बैठ लो, तुम्हें अच्छा महसूस होगा" सुजाता जी ने रजनी से कहा|
अपनी सास की बात सुनकर रजनी ने धीरे से उठने की कोशिश की पर कमजोरी के कारण उसे उठने में परेशानी हो रही थी| तब सुजाता जी ने उसकी बांह को पकड़कर उसे सहारा दिया और धीरे-धीरे उसे लेकर बरामदे तक पहुंची|
रजनी को कुर्सी पर बिठा कर सुजाता जी रसोई में गई और उसके लिए चाय और रजनी के मनपसंद नमकीन बिस्किट लेकर आई| रजनी के कमजोर चेहरे पर एक मुस्कुराहट खिल उठी| वह चाय पीने लगी, सुजाता जी ने कहा, "मैं तेरे लिए गरमा गरम नाश्ता बना कर लाती हूं|"
सुजाता जी वापस लौटने लगी तो उन्होंने देखा कि उनकी पड़ोसन अपने बरामदे पर खड़ी होकर उन दोनों पर नजर गड़ाए हुए थी| पड़ोसन को देखकर सुजाता जी मुस्कुराने लगी तो बदले में पड़ोसन भी मुस्कुराने लगी | थोड़ी देर बाद सुजाता जी नाश्ता बना कर रजनी को फिर से सहारा देकर अंदर ले गई |
दोनों सास -बहू ने साथ में नाश्ता किया| सुजाता जी ने रजनी को दवाई खिलाकर आराम करने को कहा और खुद कपड़े धोकर बाहर कपड़े सुखाने के लिए गई| उन पर नजर पड़ते ही पड़ोसन उनके पास आई और उनकी तरफ देखते हुए बोलने लगी, "बहन जी आपकी बहू को ऐसा क्या हो गया है कि आप इतना काम कर रही हो और वह एकदम आराम से बैठी हुई है| " "अरे, नहीं - नहीं मेरी बहू की तबीयत खराब है, इसलिए मैं उसकी देखभाल कर रही हूं | वैसे तो वही सब कुछ करती है| "सुजाता जी ने मुस्कुराते हुए कहा| "अच्छा -अच्छा बहू की तबीयत खराब है मैं तो ऐसा पहली बार देख रही हूं कि कोई सास, बहू के लिए इतना कर रही है, वर्ना बहू की सेवा कौन करता है | "पड़ोसन ने कहा|
"जब मेरी तबीयत खराब होती है तो वह भी तो मेरी देखभाल करती है तो अगर उसकी तबीयत खराब होगी तो उसकी देखभाल कौन करेगा बहन जी? वह हमारे परिवार को अपनाने के लिए अपना मायका छोड़कर हमारे लिए सब कुछ कर रही है, तो उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी तो हमारी ही है ना?" सुजाता जी ने आगे कहा|
"हां, आपकी बात भी ठीक है लेकिन हमारे समय में तो कितनी भी तबीयत खराब होती थी सास मदद नहीं करती थी| सब हमें ही करना पड़ता था|" पड़ोसन ने अपना समय याद करते हुए कहा|
"हां तो क्या हुआ, उस समय अगर किसी ने बहू के बारे में नहीं सोचा तो क्या हुआ हम तो अच्छी सास बनकर अपनी बहू के बारे में सोच सकते हैं ना|" सुजाता जी ने मुस्कुराते हुए कहा|
"हां बहन जी, आप बिल्कुल सही कह रही हो, हम ही तो रिश्तों की नई परिभाषा बनाएंगे|" पड़ोसन ने सहमति में सिर हिलाते हुए कहा|
- Snehlata Singh
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