*सुजाता को लगता था कि उसके सास-ससुर की 'देहाती' आदतें उसकी हाई-सोसाइटी इमेज पर धब्बा हैं, लेकिन एक पार्टी ने ऐसा सच उजागर किया कि उसका घमंड कांच की तरह बिखर गया और उसे समझ आया कि जड़ें जितनी गहरी होती हैं, पेड़ उतना ही ऊँचा जाता है।* --- शाम के सात बज चुके थे। 'ग्रीनवुड विला' की लॉन में रंग-बिरंगी लाइट्स जगमगा रही थीं। आज सुजाता और रवि की शादी की दसवीं सालगिरह थी। शहर के नामी-गिरामी लोग, बिजनेस टायकून और सुजाता की किटी पार्टी की सहेलियाँ—सबको न्योता दिया गया था। सुजाता ने इस पार्टी की तैयारी महीनों पहले शुरू कर दी थी। वह चाहती थी कि सब कुछ परफेक्ट हो। डेकोरेशन से लेकर खाने तक, हर चीज़ में 'क्लास' झलकनी चाहिए। लेकिन सुजाता के माथे पर चिंता की लकीरें थीं। और उस चिंता का कारण कोई और नहीं, बल्कि उसके सास-ससुर, रामेश्वर जी और कावेरी देवी थे। वे दोनों गाँव से आए थे। सीधा-सादा पहनावा, ठेठ बोली और ज़मीन से जुड़े लोग। रामेश्वर जी धोती-कुर्ता पहनते थे और कावेरी देवी सूती साड़ी। सुजाता को हमेशा लगता था कि वे उसकी मॉडर्न लाइफस्टाइल में 'मिसफिट' हैं। जब भी घर पर कोई मेह...