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मैं एक बैश्या का बेटा हूँ

 माफ कीजिएगा  हो सकता है आपको यह कहानी सुनकर  कर बुरा लगे क्यूँकि कहानी मे र कुछ अश्लील बातें भी लिखी हुई है अगर बुरा लगे तो हमें माफ़ कीजिएगा। लेकिन कथा को वास्तविक लगने के लिए जरूरी था।  


अरी  ओ मालती बैश्या साली क्या तेरा एक बेटा भी है जो अपने अंग्रेज़ी स्कूल में भर्ती कराया है?

हाँ बाबू मेरा बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा है!

दीनानाथ मास्टर जी हमारे झुग्गी में पढ़ाने आते है उन्ही ने कहा की मेरा बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा है उसे पढ़ाने के लिए इसीलिए मैंने स्कूल में दाख़िला दिलवा दिया!

गर्व से सीना चौड़ा करके एक बिजयी मुस्कान के साथ क्यूँ ना हो मालती के जैसी बैश्या एक झुग्गी में रहने वाली इतने बड़े स्कूल में उसका बेटा पढ़ता है !

अरे साली बैश्या तेरा बेटा अंग्रेज़ी स्कूल मैं पड़ेगा! साली कोई फ़र्क़ नहीं रहेगा एक इज़्ज़तदार आदमी के बेटे मैं और एक बैश्या के बेटे मैं! मेरा बेटा भी उसी स्कूल में पढ़ता है! एक तरह से मारते मारते ही देबी बाबू ने बोला !

इतना शौक़ है बुला साली अपने बेटे को!

मालती किसी भी प्रकार से देबी बाबू के पैरों पर गिर कर उन्हें मनाने लगी कि उनके बेटे को देवी बाबू उसके काम के बारे में कुछ नहीं कहा, अन्यथा उसका बेटा सभ्य समाज में नहीं जा पाएगा, और फिर उनकी शिक्षा भी खराब हो जाएगी !!

हालांकि, मालती ने उस दिन संभाल लिया यह बोल कर की आज उसको बिना पैसे का अपना शरीर सौपने को तैयार है वो बेचारी और कर भी क्या सकती है एक बैश्या अपने बेटे के सामने शर्मिंदा होने से अच्छा है की देबी बाबू आज बिना पैसे का ही उसका शरीर भोग ले! और मालती अपने बेटे को भी दूसरों के सामने शर्मिंदा नहीं कर सकती थी!

लड़का एक बड़े अंग्रेज़ी स्कूल में पड़ता है, और वह एक वेश्या है, मालती शर्म और डर को अपने अंदर लिए जी रही थी की कहीं उसके बेटे को या उसके स्कूल में किसी को पता ना चले!

मालती को डर था कि अगर लड़के ने वेश्या मां को छोड़ दिया, तो इन सभी विचारों से वह डर गया और बड़े अंग्रेज़ी स्कूल का खर्च चलाते चलाते मालती थक हार जा रही थी लेकिन उसकी आत्मा ने कभी नहीं हारा इसी तरह मालती अपना परिवार और बेटे का स्कूल का ख़र्चा किसी तरह चला रही थी!

हालाँकि भगवान ने भी शायद इस बैश्या की सुन ली थी जो अपना शरीर बेच कर पैसा कमा रही थी और उसका बेटा भी जो पढ़ने में अच्छा था आज पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम आया है!

आज मालती जल्दी घर लौट गयी  है और किसी को भी अपना शरीर छूने भी नहीं दिया है!

जब वह घर लौटती है तो मालती का बेटा बोलता है की माँ हमारे विश्वविद्यालय में पुरस्कार देने का कार्यक्रम है और तुम्हें भी मेरे साथ चलना है और बोलते हुए लड़के मां को गले लगा लेता है, यह देखो आपका नामांकित किया हुआ यह कार्ड उपलब्ध है!

यह सुन कर मालती बोलती है की बेटा वोह एक बड़ा स्कूल है, सभी बड़े लोग है मैं ग़रीब अनपढ़ क्या करूँगी जाकर तू ही चला जा! इस पर मालती का बेटा बोलता है की ठीक है माँ अगर तुम नहीं चलोगी तो फिर मैं जाकर क्या करूँगा मैं भी नहीं जाऊँगा!

मालती को किसी भी प्रकार से मना कर के साथ जाने के लिए सहमत कर लिया!

अगली सुबह, मालती ने अपनी स्वर्गवासी पति का दिया हुआ साड़ी जो उसके शादी के बाद पहली बार उसके पति ने दिया था उसी को उसने पहन लिया आज वोह खुश है कि आज वह थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन दूसरे बड़े घर के लोगों से मिल जाएगी, पति की मृत्यु के बाद पहली बार!

लेकिन अगले ही पल एक डर ने उसे जकड़ लिया एक अद्भुत भावना, कितने लोग, अच्छे लोग, कितने बड़े बड़े लोग है, इसी डर ने मालती का पीछा ही नहीं छोड़ा "अगर लड़का जान गया कि मैं वेश्या हूँ!"

समारोह के जगह जाते ही मालती देखती है की सामने ही देबी बाबू बैठे है!

मालती एकदम पीछे जाकर एक सीट पर अपना सर छुपा कर बैठ गयी कहीं देबी बाबू उसको देख ना ले उसके लिए उसके बेटे को कहीं लोग ना बोल बैठे की उसका बेटा एक बैश्या का बेटा है, अगर वह उसे नहीं देखती तो आज सबको पता चल जाता!

समारोह शुरू हो गया है, अब मालती के बेटे को पुरस्कार प्राप्त करने के लिए मंच पर बुलाया जाता है लेकिन मालती की आँखें नीचे ही देख रही थी क्योंकि अगर उसको देवी बाबू ने देख लिया तो फिर क्या अनर्थ हो जाएगा!

स्टेज पर मालती के बेटे, पुरस्कार पाने के बाद,

माइक पकड़ कर बोलने लगा की आमंत्रित अतिथी गन

"मैं एक बैश्या का बेटा हूं" हां, मुझे गर्व है कि मैं उनका बेटा हूं "मालती के बेटे ने पूरे सभागार को चुप कर दिया था!

वहाँ देखो मेरी मां को देखो !!!

पिछली सीट में बैठी है अपने आप को छिपा कर।

अपना सिर उठाओ माँ लो आज आपको सभी को देखने दो की आप मेरी मां हैं, मुझे आप पर गर्व है माँ!

उस दिन जब देवी बाबू ने आप का अपमान किया, मैं दरवाजे के पास खड़ा था और सब कुछ सुना, उसी दिन मैंने अपने आप से वादा किया था कि एक दिन मैं सबके सामने आपका सर ऊँचा करूँगा आज वोह दिन आ गया है माँ, यह तुम्हारा उपहार  है माँ!

आज मैं प्रथम आया हूँ यह एक सामान्य है, लेकिन मैं एक बैश्या का बेटा हूँ  और प्रथम आया हूँ यह असमान्य है! मालती के आँखों में ख़ुशी के आँसू है आज वोह भी अपने आपको गर्व महसूस कर रही है आज और उसको शर्म डर नहीं लग रही है!

आज पूरा सभागार सुन रहा है और एक बैश्या का बेटा बोल रहा है!!!


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