मुझे बारिश का मौसम बहुत सुहावना लगता है प्रायः चाय पीते हुए बारिश को देखने का लुप्त उठाया करती हूँ। । मिटटी की सोंधी खुशबु और बारिश की बूंदों की आवाज बहुत मधुर लगती हैं जब तेज बहाव के साथ पानी बालकॉनी में आता तो उस वर्षा के फुहार के छींटें , चेहरे पर पड़ते ही एक खुशनुमा सिरहन सी दौड़ पड़ती है। लगभग तीन दिन से बरसात हो रही थी कभी मूसलाधार तो कभी बूंदा -बूंदी । अभी नाली और सड़कें सब लबालब बरसात के पानी से भरने लगी जो करीब 2 फुट था। गाड़ी ,दोपहिया वाहनों के टायर पानी में डूबे हुए थे। हवाएं ऐसी चल रही थी कि छाते को लोग सभांल नहीं पा रहे थे। मैंने बालकॉनी में चेयर पर बैठते हुए अपनी घरेलू परिचारिकाओं को चाय बनाकर वहीँ पर देने को कहा। जब सीमा ने चाय का कप पकड़ाया तो मैं थोड़ी उत्साहित होकर बोली --जाओ, तुमलोग भी यहीं चाय लेकर आ जाओ। जब हम इकठ्ठे बैठकर चाय पी रहे थे तो मैंने कहा -'सच में कितना अच्छा लगता है न !ऐसे चाय पीते हुए ब...