Skip to main content

Posts

चिंता की लकीरें

  पिछली रात बड़ी बेचैनी से कटी....बमुश्किल सुबह एक रोटी खाकर घर से अपनी दुकान के लिए निकला..... आज किसी के पेट पर पहली बार लात मारने जा रहा हूं ये बात अंदर ही अंदर कचोट रही है.... जिंदगी में यही फ़लसफ़ा रहा मेरा की .... अपने आस पास किसी को रोटी के लिए तरसना ना पड़े..... पर इस विकट काल मे अपने पेट पर ही आन पड़ी है... दो साल पहले ही अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर कपड़े का शोरूम खोला था मगर दुकान के सामान की बिक्री, अब आधी हो गई है अपनी ही कपड़े की दुकान मे दो लड़के और दो लड़कियों को रखा है मैंने ग्राहकों को कपड़े दिखाने के लिए... लेडीज डिपार्टमेंट की दोनों लड़कियों को निकाल नहीं सकता... एक तो कपड़ो की बिक्री उन्हीं की ज्यादा है। दूसरे वो दोनों बहुत गरीब है दो लड़कों में से एक पुराना है, और वो घर में इकलौता कमाने वाला है जो नया वाला लड़का है दीपक.... मैंने विचार उसी पर किया है शायद उसका एक भाई भी है, जो अच्छी जगह नौकरी करता है और वो खुद, तेजतर्रार और हँसमुख भी है उसे कहीं और भी काम मिल सकता है... पिछले सात महीनों मे....मैं बिलकुल टूट चुका हूं स्थिति को देखते हुए एक वर्कर कम करना मेरी मजबूरी है यही सब सो...

मैं एक बैश्या का बेटा हूँ

  माफ कीजिएगा  हो सकता है आपको यह कहानी सुनकर  कर बुरा लगे क्यूँकि कहानी मे र कुछ अश्लील बातें भी लिखी हुई है अगर बुरा लगे तो हमें माफ़ कीजिएगा। लेकिन कथा को वास्तविक लगने के लिए जरूरी था।   अरी  ओ मालती बैश्या साली क्या तेरा एक बेटा भी है जो अपने अंग्रेज़ी स्कूल में भर्ती कराया है? हाँ बाबू मेरा बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा है! दीनानाथ मास्टर जी हमारे झुग्गी में पढ़ाने आते है उन्ही ने कहा की मेरा बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा है उसे पढ़ाने के लिए इसीलिए मैंने स्कूल में दाख़िला दिलवा दिया! गर्व से सीना चौड़ा करके एक बिजयी मुस्कान के साथ क्यूँ ना हो मालती के जैसी बैश्या एक झुग्गी में रहने वाली इतने बड़े स्कूल में उसका बेटा पढ़ता है ! अरे साली बैश्या तेरा बेटा अंग्रेज़ी स्कूल मैं पड़ेगा! साली कोई फ़र्क़ नहीं रहेगा एक इज़्ज़तदार आदमी के बेटे मैं और एक बैश्या के बेटे मैं! मेरा बेटा भी उसी स्कूल में पढ़ता है! एक तरह से मारते मारते ही देबी बाबू ने बोला ! इतना शौक़ है बुला साली अपने बेटे को! मालती किसी भी प्रकार से देबी बाबू के पैरों पर गिर कर उन्हें मनाने लगी कि उनके बे...

सौभाग्य

  दिन भर की दौड़ धूप के बाद अब रात के ग्यारह बजे फुरसत मिली है कमर सीधी करने की.. चार दिन बाद महक की शादी है और कल से मेहमान भी आने शुरू हो जाएंगे थक कर चूर थी मैं.. लेकिन नींद आंखों से जैसे कोसों दूर थी.. आज महक को लहंगा चुन्नी के साथ उसकी पसंद का डायमंड सैट ना मिलने पर महक ने ऐसी बात कह दी जिसने मन को अन्दर तक हिला दिया "क्या मम्मा आप भी.. बीस वर्षों में इतना भी इकट्ठा नही कर पाई कि अपनी बेटी को उसकी पसन्द की ज्वैलरी दिला सकें.. आज से बाईस वर्ष पुरानी वह घटना जैसे पुर्नजिवित हो गई जब मेरी शादी होने वाली थी और मैने मां से मेरी शादी में अपनी सहेलियों से प्राप्त अंगूठी (जो मेरी आठों सहेलियों ने मिलकर मुझे गिफ्ट की थी)जो मां मुझे शादी के बाद पगफेरे की रस्म मे देने की कह रही थी लेकिन मैं शादी की अन्य ज्वैलरी के साथ शादी के वक्त ही ले जाने पर अड़ी हुई थी मां ने मुझसे बहुत गुजारिश की लेकिन मैं टस से मस ना हुई उम्र का तकाजा कहिए या नादानी मैं वो अंगूठी लेने पर अड़ी रही और मां मुझे उस वक्त ना देने पर.. मेरी जिद थी और मां की मजबूरी.. क्योंकि उस वक्त घर के हालात ऐसे नही थे कि दूसरी अंगूठी खर...

तृप्त

  मम्मी ये तृप्ति कया होती हैं ....छोटीसी आराध्या ने उत्सुकतावश सुधा से पूछा जो रसोईघर में रोटियां सेंक रही थी.. तृप्ति..... आराध्या वो तो आप अपने पापा जी से पूछो ... अखबार पढ रहे मोहन की ओर इशारा करते हुए सुधा बोली .... पापा ....पापा ...आप ही बताइए ना ये तृप्ति कया होती है अरे वाह....आज हमारी आराध्या को तृप्ति के बारे मे जानने की इतनी उत्सुकता कयो है हमें भी तो पता चले ...मोहन अखबार को एक ओर रखकर आराध्या को अपने पास बिठाते हुए बोला.... बताइए ना....आज आँनलाइन क्लास में टीचर ने कहा आप बच्चों को ऐसे पढते हुए देखकर मुझे तृप्ति मिलती हैं ....मुझे कुछ समझ नहीं आया वो वहां इतनी दूर और मोबाइल फोन पर कोई उन्हें कुछ दे नहीं सकता तो तृप्ति उन्हें किसने दी .... हा....हा....आराध्या.... बेटा उनके कहने का मतलब था उन्हें आप बच्चों को पढाकर आपकी पढाई का हर्जाना ना होते देखकर खुशी एक सुखद सुकून मिला.... आराध्या ने एकबारगी फिर से पापा की ओर देखा.... नहीं समझी ....देखो इतनी गर्मी में भी आपकी मम्मी आपके लिए मेरे लिए खाना बना रही हैं और हमारे स्वाद के साथ साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखती हैं अब सोचो वह ऐ...

सुसाईड नोट

  रात के साढ़े बारह बजे होंगे सुमन अपना सारा घर का काम ख़त्म कर के TV देखने लगी. एक के बाद एक चैनल बदलने लगी. जैसे कुछ देखने लायक मिल ही न रहा हो. तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी. उसके पति राज का फ़ोन था, उसने फ़ोन उठाया और धीमी सी आवाज़ में बोला, 'हेलो'. उसके बाद, सिर्फ "हां", "हम्म्म", "अच्छा" कहकर फ़ोन काट दिया. फ़ोन के साथ जैसे उसके मूड का स्विच भी ऑफ हो गया, और TV का भी. वो उठी और बच्चों के कमरे में एक बार चेक किया, कि वो ठीक से सो रहे हैं कि नहीं. उसके बाद, मटर पनीर, चिकेन सीक कबाब और पराठे, सब फ्रिज में रख दिए. वो कुछ बड़बड़ाई. "जब खाना नहीं था, तो पहले क्यों नहीं बताया. लेकिन इसमें नया क्या है? मेहनत तो सिर्फ वही करते हैं. घर में तो सब काम अपने आप ही हो जाता है." इतना कहते ही वो झटके से उठी, एक पेन और पेपर ले आई, और लिखने बैठ गयी. टाइटल था #सुसाईड_नोट डिअर हस्बैंड, मुझे वो दिन आज भी याद है, जब हम पहली बार मिले थे. उस कॉफ़ी शॉप के सोफे पर बैठ कर तुम मुझे देखते ही जा रहे थे. मैं अपने ऑफिस की मीटिंग के लिए आई थी. दो घंटों के बाद, जैसे ही मैं बाहर ...

ये दुनिया एक रेस्त्रां है

  रात मैं पत्नी के साथ होटल में रुका था। सुबह दस बजे मैं नाश्ता करने गया। क्योंकि नाश्ता का समय साढ़े दस बजे तक ही होता है, इसलिए होटल वालों ने बताया कि जिसे जो कुछ लेना है, वो साढ़े दस बजे तक ले ले। इसके बाद बुफे बंद कर दिया जाएगा।* *कोई भी आदमी नाश्ते  में क्या और कितना खा सकता है? पर क्योंकि नाश्ताबंदी का फरमान आ चुका था इसलिए मैंने देखा कि लोग फटाफट अपनी कुर्सी से उठे और कोई पूरी प्लेट फल भर कर ला रहा है, कोई चार छोले भटुरे का  ऑर्डर कर रहा है। कोई इडली, डोसा उठा लाया तो  एक आदमी दो-तीन गिलास जूस के उठा लाया। कोई बहुत से टोस्ट प्लेट में भर लाया और साथ में शहद, मक्खन और सरसो की सॉस भी।* *मैं चुपचाप अपनी जगह पर बैठ कर ये सब देखता रहा ।* *एक-दो मांएं अपने बच्चों के मुंह में खाना ठूंस रही थीं। कह रही थीं कि फटाफट खा लो, अब ये रेस्त्रां बंद हो जाएगा।* *जो लोग होटल में ठहरते हैं, आमतौर पर उनके लिए नाश्ता मुफ्त होता है।* *मतलब होटल के किराए में सुबह का नाश्ता शामिल होता है।* *मैंने बहुत बार बहुत से लोगों को देखा है कि वो कोशिश करते हैं कि सुबह देर से नाश्ता करने पहुंचें...

पीला गुलाब

  रक्षा, जरा इधर आना तो मैंने बिस्तर में लेटे-लेटे ही आवाज लगाई। 'जी, मामी कहती हुई रक्षिता पल भर में हाजिर हो गई। 'ऐसा करो, मुझे थोड़ा पानी गर्म करके दे दो पेट सेकूंगी, लग रहा है गैस बन रही है, थोड़ा पेट में दर्द भी मैंने उसकी तरफ देखते हुए कहा, 'जी, अभी लाती हूं कहते हुए वह मुडऩे को हुई। 'और सुन, अपने व आन्या के लिए ब्रेड सेक ले, स्कूल के लिए देर हो रही होगी, मामा को बोल देना, आज ऑफिस में ही नाश्ता कर लेंगे, मैं नहीं बना पाऊंगी रक्षिता किचन की ओर चली गई, उसने अपने व आन्या के लिए ब्रेड सेकी तथा दस मिनट के अंदर किशोर के लिए दो परांठे भी सेक कर रख दिए। वह और आन्या स्कूल जाने लगी तो उसने मेरे कमरे में आकर कहा, मामी हम लोग नाश्ता करके जा रहे हैं, मामा के लिए परांठे भी बना दिया है, कहिएगा। अचार या सॉस के साथ खा लेंगे, बाय...मामी। कहती हुई वह भाग गई। मैं गर्म बॉटल से पेट सेकने लगी तथा सोचने लगी, कितनी फुर्ती है इस लड़की के अंदर, अभी कुल पंद्रह की ही होगी, परंतु काम करने में होशियारी व समझदारी गजब की है। हालांकि मैं दिल से चाहती थी कि वह आज स्कूल न जाए घर में रुक कर काम करे, ...